दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को हुए ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले का मामला अब राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा कार्रवाई की माँग उठाए जाने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी से इस मुद्दे पर सवाल पूछे गए तो जवाब देने की बजाय पत्रकार पर ही भड़क गए।
उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मीडिया से उल्टा सवाल पूछते हुए वहाँ से आगे बढ़ गए। संसद परिसर में मीडिया ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से संसद मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई हिंसा को लेकर सवाल किया। इस दौरान राहुल गाँधी ने सवाल पूछ रहे पत्रकार से कहा, “भैया आप BJP के हो क्या?”
#WATCH | Delhi: "Aap BJP ke ho kya," says Lok Sabha LoP Rahul Gandhi after being asked about a press conference by family members of Delhi Police personnel injured during the students' protest pic.twitter.com/JdtL2nddpT
— ANI (@ANI) July 31, 2026
इतना कहने के बाद वह बिना कोई और जवाब दिए वहाँ से चले गए। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, राहुल गाँधी जिस सवाल का जवाब नहीं दे पाते उस सवाल पर ऐसी ही प्रतिक्रिया देते हैं, दूसरी पार्टी पर दोषारोपण शुरू कर देते हैं, पत्रकार से सवाल के जवाब में सवाल पूछने लग जाते हैं और अत में मुँह छिपाते किनारा कर लेते हैं।
इससे पहले घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया। परिवारों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान घायल हुए पुलिस अधिकारियों के साथ हुई हिंसा के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने बयां किया दर्द, भावुक कर देने वाले अनुभव साझा किए
शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई परिजन भावुक हो गए और उन्होंने उस दिन की घटनाओं का जिक्र करते हुए अपनी पीड़ा साझा की। एक घायल पुलिसकर्मी के परिजन ने रोते हुए कहा, “जब मेरे पिता उस दिन ड्यूटी के बाद घर लौटे, तो उनकी खाकी वर्दी खून से पूरी तरह लाल थी। उनके सिर और हाथों पर गंभीर चोटें थीं।”
दिल्ली पुलिस के एक ACP की पत्नी अवनीत कौर ने भी उस रात को याद करते हुए कहा, “20 जुलाई की रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर पहुंचे, तो उनकी हालत देखकर मेरी रूह कांप गई। वह दृश्य मेरे और हमारी 2 साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक और ट्रॉमेटिक था। मेरी मासूम बेटी अपने पिता को उस हालत में देखकर सहम गई थी।”
उन्होंने आगे कहा, “लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ एक अकेला इंसान या वर्दी नहीं होता। उसके पीछे उसका एक परिवार होता है-उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य परिजनों ने भी सरकार और जाँच एजेंसियों से मामले में निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की माँग की।

