CM मोहन ने किया नक्सलमुक्त MP का ऐलान , बालाघाट में बचे 2 लाल आतंकियों का भी सरेंडर: छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM बोले- यहाँ 75% नक्सली नेटवर्क ध्वस्त

मध्य प्रदेश में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार (11 दिसंबर 2025) को बालाघाट जिले में दो हार्डकोर और इनामी नक्सलियों, दीपक और रोहित ने CRPF कैंप (कोरका, बिरसा थाना क्षेत्र) में आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार, दीपक पर 29 लाख और रोहित पर 14 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

दोनों लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थे और सुरक्षा बलों को उनकी तलाश थी। अधिकारियों का कहना है कि CRPF और जिला पुलिस की संयुक्त रणनीति और लगातार दबाव के चलते यह आत्मसमर्पण संभव हुआ। बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने पुष्टि की कि जिले में अब कोई भी हार्डकोर नक्सली सक्रिय नहीं है।

सीएम ने राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त किया घोषित

इस सरेंडर के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को ‘पूरी तरह नक्सल मुक्त’ घोषित कर दिया। भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘रिहैबिलिटेशन टू रिजुविनेशन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के कारण नक्सल समस्या को निर्णायक मुकाम तक पहुँचाया गया है।

CM ने कहा, “11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ मध्य प्रदेश नक्सल मुक्त हो गया। अब मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के विकास में कोई रुकावट नहीं रहेगी।” उन्होंने बलिदान हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि समर्पित कैडर को राज्य की नीति के तहत सुरक्षा और नई शुरुआत का अवसर दिया जाएगा।

इधर, राष्ट्रीय स्तर पर भी नक्सल उन्मूलन अभियान तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन्स जारी हैं।

हाल ही में देश के सबसे कुख्यात नक्सलियों में से एक माड़वी हिड़मा का एनकाउंटर में मारा जाना सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि रही। कई अन्य बड़े नामी नक्सली भी सरेंडर या ढेर किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री ने कहा- 75% नक्सली नेटवर्क ध्वस्त

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा का कहना है कि अब तक 75% नक्सली नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। शर्मा ने कहा, “पिछले दो वर्षों में करीब 4500 नक्सलियों की संख्या कम हुई है, जिनमें 2300 ने पुनर्वास चुना, 1800 गिरफ्तार किए गए और लगभग 500 मारे गए। यह जवानों के पराक्रम और केंद्र की स्पष्ट रणनीति का परिणाम है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नक्सलियों के पास अब सिर्फ दो विकल्प हैं वह है आत्मसमर्पण या कार्रवाई का सामना करना। देश में नक्सल प्रभाव वाले कई प्रमुख इलाके, मध्य प्रदेश का पूरा बेल्ट, छत्तीसगढ़ का उत्तर बस्तर, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली का बड़ा हिस्सा और झारखंड- ओडिशा सीमा के अनेक क्षेत्र अब काफी हद तक नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि 2026 तक शेष क्षेत्रों में भी नक्सलवाद का पूर्ण अंत कर दिया जाएगा।