उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम ‘योगी की पाती’ में खेलों को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों का सम्मान करने और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब खेलों में नई पहचान बना रहा है। सरकार खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री ने लिखा, “खेल का मैदान गौरवान्वित कर रहा है। 65वीं राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की पुरुष टीम 20 पदक जीतकर पहली बार चैंपियन बनी। इससे ठीक पहले जापान में पुरुष अंडर-18 हॉकी एशिया कप का स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम में यूपी के पांच खिलाड़ियों का योगदान भी प्रदेश के लिए गर्व का विषय रहा।”
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) July 6, 2026
खेल का मैदान गौरवान्वित कर रहा है। सरकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के सम्मान एवं सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारी नौकरी प्रदान कर रही है।
आज प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान, ब्लॉक में मिनी स्टेडियम तथा प्रत्येक जनपद में आधुनिक स्टेडियम… pic.twitter.com/NPYxt42vYf
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश की धरती की पहचान अब दिवित शर्मा (क्रिकेटर), प्रवीण कुमार (पैरालंपिक ऊँची कूद), अन्नू रानी (भाला फेंक) जैसे बेटे-बेटियों से भी है। दृष्टिबाधित धाविका सिमरन शर्मा की प्रतिभा को पहचान कर लखनऊ में ट्रेनिंग दी गई, तो वह देश के लिए दौड़ने लगी। ग्रैंडमास्टर वंतिका अग्रवाल देश के लिए शतरंज की बिसात बिछाती हैं।”
‘चैंपियन एक दिन में नहीं बनते’, खेल सुविधाओं के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री ने लिखा, “चैंपियन एक दिन में नहीं बनते और खेल संस्कृति भी रातोरात नहीं बनती। प्रदेश में खिलाड़ियों के कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण और सुविधाओं में बढ़ोतरी के साथ ही खेल नीतियां भी बदली गई हैं। विभिन्न प्रतियोगिताएँ अब यूपी के युवाओं के लिए केवल खेल नहीं, अपितु ओलंपिक जैसे मंचों तक पहुँचने का माध्यम हैं। प्रदेश सरकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के सम्मान एवं सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारी नौकरी प्रदान कर रही है।”
उन्होंने कहा, “आज प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान, ब्लॉक में मिनी स्टेडियम तथा प्रत्येक जनपद में आधुनिक स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय तैयार है। प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज एवं एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएँगे, जहाँ खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएँ एवं विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा।”
‘बच्चों की खेल प्रतिभा को कभी दबाएँ नहीं’, अभिभावकों से की अपील
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से कहा, “मैं अभिभावकों से विशेष आग्रह करना चाहता हूँ कि बच्चों की खेल प्रतिभा को कभी दबाएँ नहीं। खेल केवल पदक नहीं दिलाता, अपितु नशे जैसी बुराइयों से बच्चों और युवाओं को दूर रखने के लिए सबसे सशक्त ढाल बनता है। स्वास्थ्य, सहयोग, सहभागिता, सम्मान, संघर्ष, समर्पण, अनुशासन, सकारात्मकता, समरसता एवं सफलता, इन सभी का मेल ही तो खेल है।”
उन्होंने अंत में प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए लिखा, “बच्चे एवं युवा खेलों को दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाएं। युवाओं के लिए खेल आज करियर में सपनों को साकार करने का माध्यम भी है। खेल भावना सबको साथ लेकर चलने की क्षमता तथा अगली बार और बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प विकसित करती है। यही जीवन में सफलता का आधार बनती है तथा विकसित प्रदेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।”

