कॉन्ग्रेस राज में कर्नाटक में देना पड़ रहा ‘दोगुना कमीशन’: CM सिद्धारमैया को ठेकेदार संघ ने लिखा पत्र, कहा- सरकारी विभाग नहीं दे रहे बकाया ₹32000 करोड़

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ (केएससीए) ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि अब भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया है। गुरुवार (25 सितंबर) को लिखे एक पत्र में, संघ ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में सरकारी विभागों में माँगे जाने वाले कमीशन अब ‘दोगुने’ हो गए हैं।

ठेकेदार संगठन ने सीएम को लिखा पत्र

केएससीए अध्यक्ष आर. मंजूनाथ और महासचिव जी. एम. रवींद्र ने सीएम सिद्धारमैया को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है, “जब आप विपक्ष के नेता थे, तो आपने हमें आश्वासन दिया था कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई, तो ठेकेदारों को बिल पास कराने के लिए कमीशन नहीं देना पड़ेगा। हमें आपको यह बताते हुए खेद हो रहा है कि पिछली सरकार की तुलना में अब कमीशन दोगुना हो गया है।”

केएससीए के अनुसार, कर्नाटक ग्रामीण संरचना विकास निगम लिमिटेड यानी केआरआईडीएल जैसी सरकारी संस्थाएँ निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोगियों को परियोजनाएँ दे रही हैं। ये लोग अपने लिए एक हिस्सा रख कर, परियोजनाओं का ठेका दूसरे ठेकेदारों को दे देते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इससे परियोजनाओं में गुणवत्ता बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

यह पहली बार है जब केएससीए ने कॉन्ग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर औपचारिक पत्र लिखा है। इससे पहले एसोसिएशन के अध्यक्ष मंजूनाथ ने इस मुद्दे पर लिखित रूप में कभी शिकायत नहीं की थी। हालाँकि सार्वजनिक बयान जरूर दिया था।

अपने पत्र में, केएससीए ने कॉन्ग्रेस को यह भी याद दिलाया कि उनके समर्थन से ही कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की सत्ता में वापसी हुई। केएससीए ने कॉन्ग्रेस सरकार से 32,000 करोड़ रुपये के लंबित बिलों को जारी करने का आग्रह किया है।

लंबित बिल और अनुचित व्यवहार

ठेकेदारों के संगठन ने कहा कि वह लगभग ₹32,000 करोड़ के बिलों के निपटारे का इंतज़ार है। हालाँकि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है और अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संगठन का कहना है कि विभाग हर तीन महीने में एक बार लंबित बिल राशि का केवल 15-20% चुका रहे हैं, इससे पैसे बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए वरिष्ठता को भी दरकिनार किया जा रहा है।

केएससीए ने नगर प्रशासन, शहरी विकास और श्रम जैसे विभागों पर टेंडर देने की पूरी प्रक्रिया में हेराफेरी करने का भी आरोप लगाया। एसोसिएशन का कहना है कि टेंडरों को कथित तौर पर बड़े पैकेजों में बदला जा रहा है ताकि उन्हें अक्सर चुनिंदा ताकतवर ठेकेदारों को दिया जा सके। एसोसिएशन का दावा है कि इन अनियमितताओं के बावजूद मंत्री स्थिति को सुधारने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।

सिद्धारमैया द्वारा MUDA घोटाला

ठेकेदारों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब सिद्धारमैया सरकार मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि घोटाले को लेकर पहले से ही निशाने पर है।

यह घोटाला सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनकी पत्नी, बीएम पार्वती को भूमि के आवंटन से जुड़ा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

कम से कम तीन कार्यकर्ताओं, प्रदीप कुमार, टीजे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को लिखित शिकायत पत्र देकर मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता टीजे अब्राहम ने विशेष रूप से दावा किया कि सिद्धारमैया की पत्नी को मैसूर के एक पॉश इलाके में 14 भूखंडों के अवैध आवंटन से लगभग ₹45 करोड़ का नुकसान हुआ। जुलाई में लोकायुक्त पुलिस को दी गई उनकी शिकायत में न केवल सिद्धारमैया और उनकी पत्नी का नाम था, बल्कि उनके बेटे एस यतींद्र और MUDA के वरिष्ठ अधिकारियों का भी नाम था।