अल-फलाह यूनिवर्सिटी में लगते थे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे, हिंदू स्टाफ को किया जाता था प्रताड़ित: पूर्व कर्मचारी का खुलासा, कहा- रोज 150 मरीजों की फर्जी फाइल बनवाते थे आतंकी उमर-मुजम्मिल

दिल्ली ब्लास्ट मामले की जाँच में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी एजेंसियों के रडार पर आ गई है। यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के एक पूर्व कर्मचारी ने बड़ा हैरान करने वाला खुलासा किया है। कर्मचारी के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टर के कहने पर अस्पताल में रोजाना 100 से 150 तक मरीजों की फर्जी फाइलें तैयार की जाती थीं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जाँच एजेंसियाँ अब यूनिवर्सिटी के हर लेन-देन और गतिविधियों की बारीकी से जाँच कर रही हैं।

फर्जी फाइलों का खेल

राजस्थान के रहने वाले पूर्व नर्सिंग स्टाफ लक्ष्मण ने दावा किया कि अल-फलाह में यह फर्जी फाइलें बनाने का काम आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ मुज़म्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर डॉ उमर नबी के निर्देश पर होता था।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में रात की ड्यूटी में कर्मचारियों को कम से कम 5 फर्जी फाइलें बनाने का टारगेट दिया जाता था। इन फाइलों में बिना इस्तेमाल हुई दवाइयों का भी जिक्र होता था। लक्ष्मण का मानना है कि इन फाइलों के जरिए गरीबों के इलाज के नाम पर बड़ी फंडिंग मँगाई जाती थी।

आदेश न मानने पर सजा और कैंपस में पाकिस्तान के नारे

लक्ष्मण ने बताया कि जो कर्मचारी इन फर्जी फाइलें बनाने के आदेश को नहीं मानते थे, उन्हें ऐबसेंट दिखाकर उनकी सैलरी काट ली जाती थी या रोक दी जाती थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टाफ के साथ भेदभाव किया जाता था।

पूर्व कर्मचारी ने बताया कि उनके साथ नाइट ड्यूटी करने वाले कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और कुछ डॉक्टर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। कई बार तो वे हँसी-मजाक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगा देते थे। सूत्रों के अनुसार, जाँच एजेंसियाँ अब डॉ शाहीन सईद और डॉ मुज़म्मिल के संदिग्ध सामान खरीदने की गतिविधियों की भी जाँच कर रही हैं।

छात्रों के अभिभावकों की चिंता

इस विवाद के बाद यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावक भी चिंतित हैं। 360 से अधिक अभिभावकों ने वर्चुअल मीटिंग की है और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। वे जल्द ही हरियाणा सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक माँग पत्र सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।