दिल्ली में हुए धमाके के तार जिस फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, उसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी अब एक बड़े जमीन घोटाले के घेरे में हैं। जाँच एजेंसियों को पता चला है कि सिद्दीकी ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके ऐसे लोगों की जमीन बेच डाली जो सालों पहले मर चुके थे।
मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करना) के मामले में पहले से गिरफ्तार सिद्दीकी पर अब धोखाधड़ी, अवैध संपत्ति हस्तांतरण और आतंकी फंडिंग से जुड़े होने की जाँच हो रही है।
कैसे हुआ ‘मुर्दा लोगों’ की जमीन का फर्जीवाड़ा?
जाँच में पता चला है कि नई दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में जमीन को ‘तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन‘ (जो सिद्दीकी से जुड़ा है) को बेचा गया था। इस बिक्री के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) नामक दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया, जो कि पूरी तरह नकली था।
जाँचकर्ताओं ने पाया कि 2004 में बनाए गए इस दस्तावेज पर जिन लोगों के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर थे, उनमें से कई तो 1972 से 1998 के बीच ही मर चुके थे। मरे हुए लोगों में नाथू (1972 में मौत), हरबंस सिंह (1991), हर्केश (1993), शिव दयाल (1998) और जय राम (1998) नाम शामिल है। मृतकों के के नाम, अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर का उपयोग करके, 2013 में 75 लाख रुपए में यह जमीन फाउंडेशन को बेची गई। अधिकारियों के मुताबिक, यह लेनदेन हर स्तर पर अवैध है।
सिद्दीकी के नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच
यह जमीन घोटाला सिद्दीकी पर चल रही कई जाँचों में से सिर्फ एक हिस्सा है। सिद्दीकी शिक्षा, सॉफ्टवेयर और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कम से कम 15 कंपनियों से जुड़े हुए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को शक है कि अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर आए पैसे को कंस्ट्रक्शन या कैटरिंग के ठेकों के बहाने सिद्दीकी के परिवार की कंपनियों में भेजा गया। इस धोखाधड़ी की जाँच तब शुरू हुई जब पता चला कि यूनिवर्सिटी ने मान्यता के बारे में झूठे दावे किए थे।
आतंकी मॉड्यूल से संबंध की छानबीन
भले ही सिद्दीकी या यूनिवर्सिटी का सीधा संबंध दिल्ली धमाके से अभी तक साबित नहीं हुआ है, लेकिन जाँच एजेंसियाँ यह पता लगा रही हैं कि धमाका करने वाला डॉ उमर उन नबी और उसके गिरफ्तार साथियों का यूनिवर्सिटी से क्या संबंध था। सिद्दीकी के वित्तीय नेटवर्क की गहराई से जाँच की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि क्या इस बड़े वित्तीय जाल का इस्तेमाल कहीं आतंकी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया गया था।

