दिल्ली कार ब्लास्ट केस की जाँच में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को आतंकी आदिल के मोबाइल से डिलीट की गई व्हाट्सएप चैट्स बरामद हो गई हैं, जो धमाके की फंडिंग पर नया मोड़ ला रही हैं। ये चैट्स 5, 6, 7 और 9 सितंबर की हैं, जिसमें आदिल अपने हैंडलर से एडवांस सैलरी और तत्काल पैसे की बेचैनी भरी गुहार लगाता नजर आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ब्लास्ट में इस्तेमाल हुए कुल 26 लाख रुपए में से करीब 8 लाख रुपए की व्यवस्था खुद आदिल ने की थी। पूछताछ में सह-आरोपित मुजम्मिल ने खुलासा किया, “आदिल को हम ट्रेजरर कहते थे, वो फंडिंग का इंतजाम करता था।” एनआईए अधिकारियों का मानना है कि ये पैसे सीधे साजिश से जुड़े हो सकते हैं और अब ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल खंगाली जा रही है।
चैट्स में आदिल की बेचैनी साफ झलकती है। 5 सितंबर को उसने लिखा, “गुड आफ्टरनून सर, मैंने सैलरी क्रेडिट करने के लिए रिक्वेस्ट की थी… पैसों की बहुत जरूरत है सर। मेरे ही अकाउंट में डाल देना सर, जो पहले दिया था।” अगले दिन 6 सितंबर को सुबह ही मैसेज, “गुड मॉर्निंग सर, आप कर दीजिए, आपका आभार रहेगा।”
7 सितंबर को बेचैनी चरम पर दिखी। उसने लिखा, “सर, सैलरी जल्द से जल्द चाहिए… पैसे चाहिए… प्लीज, आपकी बहुत मदद होगी।” यही नहीं, वो 9 सितंबर को भीख माँगने की स्थिति में दिखा और उसने लिखा, “प्लीज कल कर दीजिए… मुझे बहुत जरूरत है सर।”

डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने इन चैट्स को रिकवर कर केस को मजबूत कर दिया है। जाँच एजेंसियां अब फंडिंग नेटवर्क को उजागर करने पर जुटी हैं, जिसमें पाकिस्तान से लिंक की आशंका है।
आदिल की वजह से ही खुला था फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल
आदिल का बैकग्राउंड भी उतना ही खतरनाक है। वो सहारनपुर के एक हॉस्पिटल में डॉक्टर था, लेकिन पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट था। 27 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर चिपकाते सीसीटीवी में कैद हुआ था। पूछताछ में आदिल ने ही फरीदाबाद से अमोनियम नाइट्रेट की बरामदगी का राज उगला था। उसके लॉकर से एके-47 राइफल भी मिली भी।
इस मामले में एनआईए के डीजी ने कहा, “ये चैट्स फंडिंग चेन का अहम सबूत हैं, बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।” मामला फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ा है, जिसमें डॉक्टर जैसे हाई प्रोफाइल आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। इसी मॉड्यूल से जुड़े आतंकी उमर ने दिल्ली में लाल किला के सामने खुद को ब्लास्ट में उड़ा लिया था।

