दिल्ली HC से अरविंद केजरीवाल को झटका, जज बदलने की अपील खारिज: जस्टिस स्वर्णकांता की बेंच ही देखेगी शराब नीति का केस

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका दिया है। याचिका में सीबीआई द्वारा दायर आबकारी नीति से जुड़े मामले को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ से किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।

13 मार्च 2026 को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपने फैसले में प्रशासनिक स्तर पर दखल देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देने वाली CBI की याचिका मौजूदा रोस्टर के मुताबिक जस्टिस शर्मा को ही सौंपी गई थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर कोई जज खुद को मामले से अलग करना चाहे, तो इस पर फैसला संबंधित जज को ही लेना होगा, लेकिन उन्हें मामले को ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं मिला।

11 मार्च को केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने ‘गंभीर, सही और उचित आशंका’ जताने की बात कही थी। इसमें कहा गया था कि जस्टिस शर्मा की बेंच में इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से नहीं हो पाएगी। केजरीवाल की इस अर्जी का समर्थन पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत मामले के अन्य आरोपियों ने भी किया था, और कई तरह की चिंता जाहिर की थीं।

इनमें 9 मार्च को कोर्ट द्वारा दिया गया वह आदेश भी शामिल था, जिसमें डिस्चार्ज किए गए आरोपियों की बात सुने बिना ही CBI को अंतरिम राहत दे दी गई थी। इसके अलावा, रिवीजन याचिका पर जल्दबाजी में की गई सुनवाई, और एक्साइज पॉलिसी से जुड़े अन्य मामलों में जस्टिस शर्मा द्वारा पहले दिए गए वे फैसले भी शामिल थे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था या जिन पर सवाल उठाए थे।

केजरीवाल सरकार पर 2021-22 की शराब नीति में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 27 फरवरी 2026 को, एक ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को मामले से बरी कर दिया था। कोर्ट ने CBI की जाँच के कुछ पहलुओं की आलोचना करते हुए, जाँच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की थी। CBI ने तुरंत ही इस डिस्चार्ज आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी थी।

जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर 9 मार्च को नोटिस जारी किया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी, जिसमें CBI के अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। साथ ही, उन्होंने प्रथम दृष्टया यह टिप्पणी भी की कि डिस्चार्ज आदेश में की गई कुछ टिप्पणियाँ गलत थीं। कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि जब तक CBI से जुड़े इस मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही संबंधित कार्यवाही को भी स्थगित रखा जाए।

मामले को ट्रांसफर करने की अर्जी खारिज होने का मतलब यह है कि CBI द्वारा दी गई चुनौती पर सुनवाई अब जस्टिस शर्मा की बेंच में ही जारी रहेगी। केजरीवाल और उनके सहयोगियों को पिछले महीने ट्रायल के चरण में ही बरी कर दिया गया था, लेकिन हाई कोर्ट की कार्यवाही इस नतीजे को बदल सकती है।