गालियाँ दीं, माइक छीनने की कोशिश की और हिंदू-मुस्लिम करने का लगाया आरोप: दिल्ली में जामा मस्जिद के पास मुस्लिम युवकों ने महिला पत्रकार से की बदसलूकी

दिल्ली में मुस्लिम युवकों द्वारा एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। नेशनल न्यूज हिंदी ने शनिवार (6 दिसंबर 2025) को एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनकी रिपोर्टर निशा पाल को मुस्लिम युवकों द्वारा परेशान किया जा रहा था। लोगों से बातचीत करते वक्त मुस्लिम युवकों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

निशा दिल्ली के लाल किला इलाके में जामा मस्जिद के पास उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के बारे में एक व्यक्ति से बात कर रही थीं। इस दौरान कुछ मुस्लिम युवक उनके पास आए और उन्हें गालियाँ देने लगे।

कैसे शुरू विवाद

वीडियो में दिखा कि तीन मुस्लिम युवक बिना हेलमेट के एक बाइक पर आए। आते ही उन्होंने रिपोर्टर निशा पाल के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। एक युवक ने उनका माइक छीनने की कोशिश की जबकि दूसरा वीडियो बनाते हुए उनसे बार-बार पूछता रहा कि वह किस मीडिया चैनल से हैं।

युवकों ने आरोप लगाया कि वह नफरत फैलाती हैं और हिंदू-मुस्लिम मुद्दे बनाती हैं। एक युवक ने तो उन्हें कचरा मीडिया तक कह दिया। इस बीच वीडियो बना रहे युवक ने अपने साथी से कहा, “100 नंबर पर कॉल करो, शिकायत करेंगे।” धीरे-धीरे और युवक वहाँ जुटने लगे और माहौल बिगड़ने लगा। तभी एक स्थानीय व्यक्ति ने आगे आकर युवकों को रोकते हुए कहा कि वह उन्हें परेशान न करें।

रिपोर्टर ने कहा- यह पहली बार नहीं, जब मैंने उन्हें नजरअंदाज किया

कैमरे पर आरोपों और धक्का-मुक्की का जवाब देते हुए निशा ने कहा, “आप देख सकते हैं कि कैसे इस तरह के लोग अक्सर आकर माहौल बिगाड़ देते हैं। वे हमें गालियाँ देते हैं। मुझे नहीं पता कि वे कहाँ से आते हैं। वे हमें परेशान करने और बदतमीजी से पेश आने के लिए यहाँ आते हैं। गालियाँ देने के बाद, वे हम पर हिंदू-मुस्लिम के बीच फूट डालने का आरोप लगाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक औरत हूँ। आप खुद देख सकते हैं, कितने सारे मर्द मेरे साथ सरेआम बदसलूकी कर रहे हैं। ये उनकी गुंडागर्दी है। मेरे साथ पहले भी ऐसा हो चुका है और वो फिर से पूरी योजना बनाकर आए हैं।”

चैनल ने एक और वीडियो अपलोड किया जिसमें निशा ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा, “आपने जो वीडियो देखा, उसमें लाल किले पर जब मैं जनमत सर्वे कर रही थी, तब कुछ लोग मेरे पास आए। उन्होंने मेरे साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और मेरा माइक्रोफोन छीनना शुरू कर दिया। आप साफ देख सकते हैं कि ये लोग कौन हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह पहली बार नहीं है। मेरे साथ ऐसा तीन-चार बार हो चुका है। वे बिना अनुमति के मेरा वीडियो रिकॉर्ड करते हैं, उसे अपलोड करते हैं और मेरी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं। वे यह दुष्प्रचार करते हैं कि मैं ही सांप्रदायिक वैमनस्य फैला रही हूँ। अगर वे मुझे इस तरह गालियाँ दे रहे हैं, तो वे किस तरह की हिंसा फैला रहे हैं?”

डर जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “अगर कल को मेरे साथ कुछ हो गया, अगर उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया, तो कौन जिम्मेदार होगा? हमने अक्सर उन्हें चाकू या ब्लेड लेकर घूमते देखा है। अगर उन्होंने मुझे चाकू मार दिया, तो कौन जिम्मेदार होगा? ये सब एक ही जगह से आते हैं। ये सब प्लानिंग करके आते हैं कि कैसे मुझे रिकॉर्ड करना है और कैसे मुझे निशाना बनाना है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये सब कई दिनों से हो रहा है। मैं काफी समय से इन्हें नजरअंदाज कर रही थी लेकिन अब ये रोज हो रहा है। ये मेरे कैमरामैन के साथ बदतमीजी करते हैं, मेरे साथ बदतमीज़ी करते हैं। आप ही बताइए, मुझे क्या करना चाहिए?”

Alt न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने निशाना साधा

यह पहली बार नहीं है जब निशा पाल को इस्लामवादी और वामपंथी विचारधारा वाले समूहों द्वारा निशाना बनाया गया हो। इस साल मई में Alt News के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने ‘Nehr Who’ नाम के एक और प्रोपगैंडाबाज की पोस्ट को कोट करते हुए निशा की पहचान X पर सार्वजनिक रूप से लोगों के बीच फैलाई थी।

निशा को निशाना बनाने की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने मुस्लिम बच्चों से पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और इजरायल-हमास युद्ध जैसे मुद्दों पर सवाल पूछने शुरू किए। सोशल मीडिया के एक वर्ग ने इन सवालों पर आपत्ति जताई और उनकी नाराजगी धीरे-धीरे उन्हें बदनाम करने की कोशिशों में बदल गई।

यह बात ध्यान देने लायक है कि जिन मुस्लिम बच्चों का इंटरव्यू लिया जा रहा था, वे वास्तव में भारत के पक्ष में ही बोल रहे थे। ऐसे में मोहम्मद जुबैर द्वारा उसकी पहचान सार्वजनिक करने का सिर्फ एक ही मकसद दिखता है कि किसी तरह उनके खिलाफ गुस्सा भड़काया जाए (जो पहले भी धमकियों तक पहुँच चुका है) और उसे भविष्य में मुस्लिमों से ऐसे सवाल पूछने से डराकर रोकना था।

ग्राउंड रिपोर्ट्स के खिलाफ बढ़ती ‘दुश्मनी’

इस तरह की घटनाएँ दिखाती हैं कि जमीन पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के प्रति दुश्मनी चिंताजनक रूप से बढ़ रही है, खासकर वे पत्रकार जो संवेदनशील मुद्दों को कवर करते हैं। राष्ट्रवादी रिपोर्टरों को अपने काम के दौरान लगातार डराने-धमकाने, धमकियों और भीड़ के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव की रिपोर्टिंग के दौरान OpIndia की ग्राउंड टीम को भी धमकियाँ मिलीं और उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति को कुख्यात पूर्व सिवान सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शाहाब के खिलाफ बयान देने के लिए पैसे दिए थे।

इसी तरह रिपब्लिक जैसे मीडिया संस्थानों के संवाददाताओं को भी इसी प्रकार की टार्गेटेड अटैक का सामना करना पड़ा है।