दिल्ली ब्लास्ट में आतंकी उमर का ही था हाथ, कार मलबे में मिले दांत और हड्डियों से सब कन्फर्म: अम्मी के साथ मैच हुआ DNA, तुर्की में बैठे हैंडलर ‘यू-कासा’ का भी खुलासा

लाल किला इलाके में सोमवार (10 नवंबर 2025) को हुए भयानक कार ब्लास्ट की जाँच में एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने अब यह पुष्टि कर दी है कि धमाके में मारा गया शख्स कोई और नहीं, बल्कि आतंकी डॉक्टर उमर नबी उर्फ उमर मोहम्मद ही था।

जाँच एजेंसियों ने जब जले हुए शव का DNA टेस्ट उमर के परिवार के सैंपल से करवाया, तो वह 100 प्रतिशत मेल खा गया। इससे साफ हो गया है कि यह हमला उसी ने किया था और इस साजिश का मुख्य साजिशकर्ता आतंकी डॉ उमर मोहम्मद था।

मास्टरमाइंड था ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का प्रमुख

आतंकी डॉक्टर उमर नबी फरीदाबाद में सक्रिय ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल‘ का एक प्रमुख सदस्य था और लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था। जाँच में सामने आया है कि उमर ने ब्लास्ट से करीब 11 दिन पहले ही धमाके में इस्तेमाल हुई ह्यूंडई i-20 कार खरीदी थी।

जाँच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों की लगातार बढ़ती दबिश और घेराबंदी से घबराकर आतंकी उमर मोहम्मद ने शायद खुद को और कार को एक साथ विस्फोट में उड़ा लिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी उमर के परिवार से पूछताछ की थी और उसकी अम्मी और भाई से लिए गए DNA सैंपल पूरी तरह से कार के मलबे में मिले अवशेषों से मैच कर गए हैं।

तुर्की में बैठे हैंडलर से संपर्क

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी उमर तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठे अपने हैंडलर ‘यू-कासा‘ (जो संभवतः एक कोडनेम है) से ‘सेशन ऐप‘ के जरिए लगातार संपर्क में था। ऐसा माना जाता है कि मार्च 2022 में आतंकी उमर समेत कुछ संदिग्ध लोग भारत से तुर्की गए थे, जहाँ उन्हें आतंकवाद के लिए भड़काया गया था।

अब NIA के हाथ में जाँच

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में इस कार ब्लास्ट को आधिकारिक तौर पर आतंकी हमला घोषित कर दिया गया है। इस पूरे मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है।

यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली का यह कार धमाका कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं थी। यह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े एक संगठित आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें शिक्षित और पेशेवर लोग, जैसे कि डॉक्टर भी शामिल थे। जाँच एजेंसियाँ अब इस मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क को जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों तक ट्रेस करने में जुट गई हैं।