दिल्ली में लाल किले के करीब 10 नवंबर को हुए आत्मघाती कार धमाके की जाँच में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को एक और चौंकाने वाला सुराग मिला है। इस हमले को लेकर पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल ने न सिर्फ आत्मघाती धमाके की योजना बनाई थी बल्कि यह मॉड्यूल हमास की तर्ज पर ड्रोन और छोटे रॉकेट का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर हमला करने की तैयारी भी कर रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए बम गिराने की साजिश पर भी काम कर रहा था। यह हमला ठीक वैसे करने की योजना थी जैसे हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर किया था।
जाँच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड के रहने वाले जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है। NIA की टीम ने उसे चार दिन पहले श्रीनगर से उठाया था जिसके बाद पूछताछ में सामने आई जानकारी से इस हमले को लेकर कई नए खुलासे हुए हैं।
दानिश को सोमवार (17 नवंबर 2025) को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि दानिश छोटे ड्रोन हथियार बनाने में सक्षम था और उसे बड़ी बैटरियों से लैस ऐसे ड्रोन डिजाइन करने का अनुभव था जो कैमरे और भारी विस्फोटक सामग्री दोनों को ढो सकें।
NIA के अनुसार दानिश ने आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी को तकनीकी सहायता दी थी। वह ड्रोन को मॉडिफाई करने और रॉकेट बनाने की कोशिशों में से शामिल था। एजेंसी का कहना है कि मॉड्यूल का मकसद भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से बम गिराकर अधिक से अधिक लोगों को मारना था। यह पद्धति सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और इजरायल में हमास तथा ISIS जैसे संगठनों द्वारा किए जाने वाले हमलों से मिलती-जुलती है।
जाँच में सामने आया है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा यह मॉड्यूल छोटे रॉकेट भी बनाने पर काम कर रहा था। इन रॉकेट्स को सीरियल ब्लास्ट में इस्तेमाल किया जा सकता था। एजेंसी को आशंका है कि मॉड्यूल का उद्देश्य सिर्फ एक आत्मघाती हमला ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर मल्टी-स्टेज आतंकी हमला करना था। जाँच टीम को धमाके वाली जगह से एक जूता भी मिला है। इस जूते में विस्फोटक होने की आशंका जताई गई है। इस कथित ‘जूता बम’ को लेकर भी फॉरेंसिक की जाँच चल रही है।

