केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वे 2025-26 में बदलती वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर एक अहम चेतावनी दी गई है। सर्वे इस बात पर जोर देता है कि आज की दुनिया पहले जैसी स्थिर और भरोसेमंद नहीं रही। वैश्विक व्यापार, पूँजी प्रवाह, तकनीक और सप्लाई चेन अब केवल आर्थिक फैसलों से नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक हितों से चल रहे हैं।
इसी संदर्भ में सर्वे में रामायण के ‘युद्ध कांड’ का जिक्र किया गया है, जहाँ यह संदेश मिलता है कि दुश्मन से भी अच्छी सीख ली जा सकती है, लेकिन उसके विचारों, मूल्यों या तरीकों को अपनाना जरूरी नहीं है। इस उदाहरण के जरिए सर्वे यह बताना चाहता है कि भारत को दूसरों से सीखना चाहिए, लेकिन अपनी आत्मनिर्भरता और फैसले लेने की आज़ादी को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
चीन का हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट और भारत के लिए संकेत
आर्थिक सर्वे में चीन के हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट को एक बड़े आर्थिक बदलाव के रूप में बताया गया है। दिसंबर 2025 से हैनान द्वीप को कम टैक्स वाला, सेवा-आधारित और निवेश के लिए अनुकूल आर्थिक क्षेत्र बना दिया गया है। यहाँ आयात पर बहुत कम शुल्क लगता है और अगर उत्पादों में पर्याप्त सुधार किया जाए, तो उन्हें बिना अतिरिक्त टैक्स के पूरे चीन में बेचा जा सकता है।
सर्वे के मुताबिक, हैनान को सिर्फ अभी की प्रतिस्पर्धा के तौर पर नहीं देखना चाहिए। यह भविष्य में एशिया में व्यापार के रास्तों, माल ढुलाई के नेटवर्क और निवेश के रुझान को धीरे-धीरे बदल सकता है, खासकर हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर के इलाकों में। इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन लंबे समय में यह क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
आर्थिक सर्वे के अनुसार, भारत कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है और अपनी विकास दर को बनाए रखने की क्षमता रखता है। लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत अभी भी बाहरी पूंजी, ऊर्जा और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों पर निर्भर है।

