भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुँचती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि यह ऐतिहासिक ट्रेड डील यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की भारत यात्रा के दौरान पूरी हो सकती है। यह वही समझौता है जिसे दोनों पक्ष ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ यानी सभी व्यापार समझौतों की जननी कह रहे हैं।
Charting the next phase of the India–EU Strategic partnership.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 24, 2026
A warm welcome to the President of the European Commission Ursula von der Leyen @vonderleyen, on her State Visit to India. Received by Minister of State for Commerce and Industry; and Electronics and Information… pic.twitter.com/HR9d7XLdYE
शनिवार (24 जनवरी 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत द्वारा अलग-अलग देशों के साथ किए जा रहे व्यापार और मोबिलिटी समझौते भारतीय युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेंगे। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि इन समझौतों से न सिर्फ रोजगार के नए रास्ते बनेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा को पहचान मिलेगी।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। रविवार (25 जनवरी 2026) को दोनों नेताओं को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा, जो भारत-EU संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।
« The mother of all trade deals »
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 24, 2026
We are closing in on the 🇪🇺🇮🇳 Free Trade Agreement.
See you soon in Delhi. pic.twitter.com/gfiLv2eEam
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के अलावा, मंगलवार (27 जनवरी 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में एक अहम EU-India शिखर सम्मेलन (समिट) भी आयोजित किया जाएगा। इस समिट में व्यापार, निवेश, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
भारतीय प्रतिभाओं को यूरोप में आगे बढ़ने में सहयोग देने के उद्देश्य से एक नए मोबिलिटी सहयोग ढाँचे (Mobility Cooperation Framework) की शुरुआत किए जाने की भी संभावना है। यह ढाँचा छात्रों, शोधकर्ताओं, मौसमी कामगारों और उच्च कुशल पेशेवरों से जुड़ा होगा, जिससे उन्हें यूरोप में पढ़ाई, रिसर्च और काम करने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

