कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने 18 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार की LPG आपूर्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने ‘गूगल से जुटाए गए’ आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारतीय झंडे वाले दो जहाजों द्वारा लाई गई LPG की मात्रा भारत की घरेलू गैस की कुल माँग के मुकाबले बेहद कम है। पी चिदंबरम के अनुसार, यह खेप भारत की मात्र 1.25 से 1.6 दिनों की खपत के बराबर ही है। अपनी इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने यह दर्शाने की कोशिश की कि सरकार द्वारा की जा रही यह आपूर्ति देश की जरूरतों के लिहाज से कोई खास मायने नहीं रखती।
पी चिदंबरम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “गूगल (GOOGLE) से मुझे यह जानकारी प्राप्त हुई है। 14 से 17 मार्च 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय झंडे वाले दो LPG वाहक जहाजों ‘शिवालिक और नंदा देवी’ ने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार किया है। ये दोनों जहाज कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं, जिसमें से प्रत्येक की क्षमता 46,000 मीट्रिक टन से अधिक है। यदि भारत की कुल रसोई गैस की माँग से इसकी तुलना की जाए, तो यह मात्रा देश की केवल 1.25 से 1.6 दिनों की खपत के बराबर ही है।”
GOOGLE generated the following information:
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) March 18, 2026
Based on reports from March 14-17, 2026, two Indian-flagged LPG carriers, Shivalik and Nanda Devi, successfully crossed the Strait of Hormuz, carrying a cumulative total of 92,700 metric tonnes of LPG.
•Total LPG Carried: 92,700…
हालाँकि, इन आँकड़ों और आपूर्ति की वर्तमान स्थिति का बारीकी से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पी चिदंबरम के इस दावे में महत्वपूर्ण संदर्भों (Context) की कमी है। भले ही माँग के दिनों के आधार पर उनका यह गणितीय अनुमान मोटे तौर पर सही लगे, लेकिन यह हकीकत में LPG वितरण और ‘बफर स्टॉक’ के काम करने के तरीके को नहीं दर्शाता। सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,700 मीट्रिक टन LPG थी। जब कुछ दिन पहले भारत सरकार ने एलपीजी की संभावित कमी का अनुमान लगाया था, तब कंपनियों को निर्देश दिए गए थे कि वे अनिवार्य क्षेत्रों को प्राथमिकता दें और आपूर्ति को उसी के अनुसार नियंत्रित करें, जिसमें अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं की आपूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
बाद में, केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक क्षेत्र (Commercial Sector) के लिए 20% आपूर्ति की अनुमति दी थी, जिसे हालिया रिपोर्टों के अनुसार अब बढ़ाकर 30% किए जाने की उम्मीद है। यदि हम यह मान भी लें कि इस पूरे माल का केवल 70% हिस्सा ही घरेलू उपयोग के लिए है, तो भी यह लगभग 64,890 मीट्रिक टन या 64.89 मिलियन किलोग्राम LPG बैठती है। सरल भाषा में समझें तो इसका अर्थ है कि 14.2 किलोग्राम वाले लगभग 45.7 लाख मानक घरेलू सिलेंडर।
व्यावहारिक नजरिए से देखा जाए तो यह मात्रा बिल्कुल भी कम नहीं है। आमतौर पर एक मध्यम परिवार में 14.2 किलो का एक मानक LPG सिलेंडर उनके इस्तेमाल के आधार पर लगभग 25 से 30 दिनों तक चलता है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस खेप का केवल ‘घरेलू हिस्सा’ ही 45 लाख से अधिक परिवारों की पूरे एक महीने की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी है। इतनी बड़ी मात्रा में गैस की आपूर्ति होने से रीफिल की माँग और वितरण चक्र (distribution cycle) पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में घरेलू माँग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति और रिफाइंड ईंधन का अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद है। सरकारी अधिकारियों ने भी इस बात को बार-बार दोहराया है कि निर्यात (एक्सपोर्ट) की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब घरेलू जरूरत से ज्यादा स्टॉक उपलब्ध होगा। इससे साफ पता चलता है कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश के भीतर की खपत और आम जनता की जरूरतों को पूरा करना है।
सरकार अब PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी तेजी से जोर दे रही है, जिसकी आपूर्ति में वर्तमान में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो हफ्तों के भीतर ही लगभग 1,20,000 नए पाइप्ड गैस कनेक्शन जोड़े गए हैं। यह बदलाव विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में LPG पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगा, जिससे सिलेंडर आधारित आपूर्ति पर पड़ने वाला दबाव कम होगा, जिसका उपयोग व्यावसायिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
पी चिदंबरम द्वारा LPG की खेप को केवल ‘माँग के दिनों’ के एक साधारण पैमाने (Metric) तक सीमित कर देना भ्रामक हो सकता है। असल में, इस तरह की आपूर्ति का उद्देश्य अकेले पूरे देश की जरूरत को पूरा करना नहीं होता, बल्कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल (Geopolitical Disruption) के समय में आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखना और गैस की निरंतरता बनाए रखना होता है।

