दंपति के बीच विवाद तब हुआ था, जब बीवी मायके जा रही थी। उस दौरान बीवी बगैर बुर्का पहने घर से बाहर चली गई थी। इस पर फारुक को गुस्सा आ गया था। दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ। गुस्से में ताहिरा अपने दो बच्चों को लेकर मायके चली गई थी। फारुक 15 दिन बाद अपनी बीवी को वापस बुला लाया। दोनों के बीच विवाद के बाद उसने बीवी को मारने की योजना बनाई। वह घर में सेफ्टी टैंक बनाने लगा।
वारदात के दिन उसने बीवी को चाय बनाने को कहा। उसने फिर पीछे से गोली मार दी। मौके पर बड़ी बेटी पहुँच गयी। उसे भी फारुक ने खत्म कर दिया। गोलियों की आवाज से दूसरी बेटी पहुँची, तो उसकी गला दबाकर जान मार डाली।
बाकि बच्चे घटना के वक्त घर पर नहीं थे। बच्चों के पूछने पर उसने बताया कि तीनों गाँव गए हैं। 13 दिसंबर को फारुक के माता-पिता पहुँचे। उन्होंने उससे दाहिरा और दोनों बेटियों के बारे में पूछा। लेकिन उन्हें भी छूठ बोला गया
कुछ दिनों बाद जब फारुक के अम्मी अब्बू आए, तो उन्होंने तीनों के बारे में फारुक से पूछा। फारुक ने कहा कि उसने कहा कि शामली के लिलौन गाँव में उसने किराए पर मकान लिया है। तीनों वहीं रह रही हैं। अम्मी-अब्बू को शक हुआ और जिद कर लिलौन गाँव पहुँच गए। वहाँ तीनों को नहीं देख पुलिस को अब्बू दाउद ने सूचना दी। पुलिस पहुँची तो मृतक महिला के कुछ रिश्तेदार भी पहुँच गये। फारुक ने अपनी गुनाह कबूल कर ली। इस दौरान मृतक बीवी के परिजनों ने फारुक के साथ मारपीट की।
पुलिस ने फारुक को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर सेफ्टी टैंक की खुदाई की और तीनों शवों को बरामद किया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने हत्या के लिए इस्तेमाल तमंचा भी बरामद कर लिया है।

