टैक्स प्रपोजल से आगे भारत का स्ट्रेटेजिक रोडमैप, इतिहास में पहली बार ‘पार्ट-B’ पर रहेगा बजट का फोकस: 75 साल पुरानी परंपरा तोड़ेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

रविवार (1 फरवरी) की सुबह 11 बजे जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वाँ बजट पेश करने उतरेंगी, तो देश की नजरें सिर्फ टैक्स छूट पर नहीं बल्कि उनके ‘पार्ट-B’ वाले मास्टरप्लान पर टिकी होंगी। इस बार का बजट 2026-27 केवल सरकारी खर्च का हिसाब-किताब नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ का विजन डॉक्यूमेंट बनने जा रहा है।

बजट के इतिहास में पहली बार वित्त मंत्री ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदलते हुए भाषण के ‘पार्ट-B’ को सबसे ज्यादा ताकतवर बनाया है, ताकि दुनिया को बताया जा सके कि भारत अगले 20 सालों में आर्थिक महाशक्ति कैसे बनेगा।

पुरानी परंपरा टूटी, पार्ट-B बना बजट का असली हीरो

आजादी के बाद से चली आ रही 75 साल पुरानी परंपरा को बदलते हुए इस बार बजट का पार्ट-B सबसे अहम होने वाला है। पहले पार्ट-B में सिर्फ इनकम टैक्स और GST जैसे छोटे-मोटे टैक्स बदलावों की चर्चा होती थी, लेकिन अब यह देश के भविष्य का नक्शा पेश करेगा। इसमें सरकार यह समझाएगी कि कैसे भारत अपनी घरेलू ताकत के दम पर दुनिया के बाजारों पर कब्जा करेगा।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बदलाव से निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में भाग रही है। अब फोकस केवल सालभर की योजनाओं पर नहीं, बल्कि दशकों की तरक्की पर है।

ग्लोबल हब बनने की तैयारी और विदेशी निवेश की बाढ़

भारत खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए कमर कस चुका है। सरकार का पूरा जोर ‘मेक इन इंडिया’ को अगले लेवल पर ले जाने और लॉजिस्टिक्स की कमियों को दूर करने पर है। हाल ही में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ हुए समझौतों ने विदेशी निवेश के नए दरवाजे खोल दिए हैं।

खास बात यह है कि न्यूजीलैंड और ईएफटीए देशों के साथ हुए समझौतों से भारत में करीब 100 बिलियन डॉलर का निवेश आने वाला है, जिससे अकेले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ही 50 लाख नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। चिली जैसे देशों से समझौते के जरिए भारत अब भविष्य के खनिजों यानी रेयर मिनरल्स तक भी अपनी पहुँच बना रहा है।

गाँव से शहर तक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल का जबरदस्त तड़का

भविष्य के भारत को तैयार करने के लिए सरकार ने बुनियादी ढाँचे यानी कैपेक्स पर अपना खजाना खोल दिया है। उम्मीद है कि इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर बजट में 10 से 15 फीसदी की और बढ़ोतरी होगी, जिससे सड़कों, रेलवे और डिजिटल नेटवर्क का जाल आखिरी गाँव तक पहुँचेगा। इसके साथ ही युवाओं के स्किल डेवलपमेंट पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार चाहती है कि युवाओं को सिर्फ डिग्री न मिले, बल्कि उनके हाथ में ऐसा हुनर हो जो ग्लोबल कंपनियों की जरूरत बने। कुल मिलाकर यह बजट महँगाई और घाटे को काबू में रखते हुए भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगा।