शुक्रवार (27 सितंबर 2025) को न्यूयॉर्क में 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं है। इस दौरान विदेश मंत्री ने आतंकवाद, वैश्विक सुरक्षा, विकास और व्यापार जैसे मुद्दों पर भारत का रुख साफ किया।
Watch: At the 80th session of UNGA, EAM S. Jaishankar says, "Our soldiers ensure peacekeeping, our sailors protect maritime shipping, our security forces counter terrorism and our doctors and teachers facilitate human development worldwide. Our industries produce affordable… pic.twitter.com/c3XIDrCieJ
— IANS (@ians_india) September 27, 2025
उन्होंने कहा कि दशकों से अंतर्राष्ट्रीय बड़े आतंकी हमले में पड़ोसी देश की संलिप्तता रही है। इसके कई नागरिक यूएन के आतंकवादियों की सूची में शामिल हैं।
पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ निर्दोष पर्यटकों को मारा गया। भारत ने नागरिकों की रक्षा के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल किया और हमले की साजिश रचने वालों पर नकेल कसी। आतंकवाद का मुकाबला करना बेहद जरूरी है। ये साझा खतरा है, इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मजबूत होना चाहिए। जब कोई देश खुले तौर पर आतंकवाद के समर्थन को अपनी नीति में शामिल करता है, तो उसकी निंदा की जानी चाहिए।
विदेश मंत्री करीब 15 मिनट तक बोले। उन्होंने कहा कि “जब हम अपने अधिकारों का दावा करते हैं, तो हमें खतरों का दृढ़ता से सामना भी करना चाहिए, और आतंकवाद से निपटना विशेष प्राथमिकता है.”
उन्होंने कहा, “आज हम टैरिफ में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित बाज़ार पहुँच देख रहे हैं। इसी कारण डि-रिस्किंग एक बड़ी मजबूरी बन गई है चाहे सीमित सप्लाई स्रोत हों या किसी एक बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता। आर्थिक चुनौतियाँ अब वैश्विक विमर्श के केंद्र में हैं।”
उन्होंने कहा, “हम टैरिफ अस्थिरता और अनिश्चित बाजार की दौर को देख रहे हैं। जोखिम कम करना एक बढ़ती हुई मजबूरी है, चाहे वह आपूर्ति के सीमित स्रोतों से हो या किसी खास बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता से।” उनकी ये टिप्पणी इस वक्त आई है, जब अमेरिकी टैरिफ से भारत जूझ रहा है।
विदेश मंत्री के भाषण के दौरान जमकर तालियाँ बजी। उन्होंने कहा, “एक सबसे अधिक आबादी वाले राष्ट्र के रूप में, एक सभ्य राष्ट्र के रूप में, और एक तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में, हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हम कौन हैं और क्या होंगे। भारत हमेशा अपनी पसंद की स्वतंत्रता बनाए रखेगा। और हमेशा वैश्विक दक्षिण की आवाज बनेगा।”

