सेक्स सीडी केस में पूर्व CM भूपेश बघेल को नहीं मिली राहत, मुकदमा रहेगा जारी: BJP MLA से जुड़े मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ ‘पत्रकार’ भी हुआ था गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के ‘सेक्स सीडी’ मामले नया मोड़ आया है। मामले में कॉन्ग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भूपेश बघेल को बरी कर दिया गया था।

अब भूपेश बघेल को हाई कोर्ट से राहत मिलने तक इस मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। CBI ने इस मामले में बघेल को आरोपित के रूप में नामित किया था। बघेल के वकील ने बताया कि CBI अदालत के फैसले के बाद उनके खिलाफ BNS की धारा 469 और 471 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(2) के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

CBI अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि निचली अदालत द्वारा भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त करने का फैसला सही नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, मामले में ऐसे तथ्य और परिस्थितियाँ हैं जिन पर ट्रायल के दौरान विस्तार से सुनवाई जरूरी है। इसी आधार पर बरी करने वाला आदेश रद्द कर दिया गया और अब केस फिर से आगे बढ़ेगा।

इससे CBI की निचली अदालत ने भूपेश बघेल को इस मामले में बड़ी राहत दी थी। बरी करने वाले पुराने फैसले में कहा गया था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ ऐसे ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जा सके। अदालत ने माना था कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि भूपेश बघेल सीधे तौर पर किसी आपराधिक साजिश या ब्लैकमेलिंग में शामिल थे। इसी वजह से उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

हालाँकि, इस फैसले के खिलाफ CBI ने सेशन कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि मामले के तथ्यों और जाँच एजेंसियों के सबूतों को सही तरीके से नहीं परखा गया। अब विशेष अदालत ने इसी आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले को गंभीरता को देखते हुए केवल दस्तावेजों के आधार पर आरोप खत्म नहीं किए जा सकते, इसीलिए पूरे मामले की सुनवाई जरूरी है।

क्या है मामला?

यह पूरा विवाद साल 2017 में सामने आया था। उस समय एक कथित अश्लील सीडी को लेकर हंगामा मचा था, जिसमें तत्कालीन बीजेपी सरकार के मंत्री राजेश मूणत के शामिल होने का दावा किया गया था। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यह वीडियो फर्जी है और उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर बनाया और फैलाया गया है।

इसके बाद रायपुर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई। शिकायत में कहा गया कि यह सीडी जानबूझकर तैयार की गई है और इसके इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। पुलिस जाँच में यह बात सामने आई कि वीडियो को अलग-अलग लोगों तक पहुँचाया गया और इसके जरिए सरकार को बदनाम करने की कोशिश हुई।

जाँच आगे बढ़ी तो इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा का नाम सामने आया। उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। पुलिस को विनोद वर्मा के पास से यह सीडी और उससे जुड़ा डिजिटल डेटा मिला। इसी मामले में बाद में तत्कालीन कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का भी नाम जुड़ा।

जाँच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कथित तौर पर वीडियो का इस्तेमाल भाजपा सरकार को घेरने के लिए किया गया। भूपेश बघेल पर आरोप लगे कि वे इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े लोगों के संपर्क में थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाद में जब कॉन्ग्रेस की सरकार बनी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने, तो इस केस को लेकर और सवाल खड़े हुए। आरोप लगे कि जिन लोगों पर इस केस में नाम आया था, उनमें से कुछ को सरकार या सत्ता के करीब जगह दी गई। इसे लेकर विपक्ष ने कॉन्ग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

मामले की जाँच आगे चलकर सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने अपनी जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की, जिसमें भूपेश बघेल समेत कई लोगों के नाम शामिल किए गए। आरोपों में फर्जी वीडियो तैयार करना, उसे फैलाना और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। मामला अदालत में पहुँचा और कई साल तक सुनवाई चलती रही।