बांग्लादेश के रंगपुर जिले के तारागंज उपजिला में 1971 के हिंदू स्वतंत्रता सेनानी योगेश चंद्र रॉय और उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की बेरहमी से हत्या के मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। शनिवार (6 दिसंबर 2025) रात अपने ही घर में दोनों का गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। 75 वर्षीय योगेश रॉय ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वे और उनकी 60 वर्षीय पत्नी कई वर्षों से गाँव में अकेले रह रहे थे।
मामले में शोवेन चंद्र रॉय ने तारागंज थाने में 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है। पुलिस पड़ताल की बात कर रही है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
उनके दोनों बेटों में एक शोवेन चंद्र रॉय रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) में कार्यरत है और दूसरा राजेश खन्ना ढाका पुलिस में, फिर भी हत्या के तुरंत बाद कोई औपचारिक केस दर्ज नहीं किया गया था और पुलिस ने शुरू में कोई सुराग नहीं होने की बात कही थी।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर तेजी से बढ़ रहे हमले
यह निर्मम हत्या ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस की सरकार बनने के बाद से देशभर में हिंदू समुदाय, स्वतंत्रता सेनानियों और प्रगतिशील आवाजों पर हमले बढ़ने के आरोप लग रहे हैं।
अवामी लीग के निर्वासित नेताओं ने इन हिंसाओं के पीछे सरकार की कथित नरमी और जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता को जिम्मेदार ठहराया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अल्पसंख्यकों पर हजारों हमले दर्ज किए गए।
हालाँकि एक ऐसे हिंदू मुक्तियोद्धा, जिसने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उसे और उसकी पत्नी को घर में गला काटकर बेरहमी से मार दिया जाना यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि आखिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक कितने सुरक्षित हैं।

