फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बड़ा बयान दिया है। मैक्रों ने इस मेगा डील का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ लोग इसकी आलोचना क्यों कर रहे हैं।
मैक्रों ने साफ किया कि यह समझौता भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। यह बयान रक्षा मंत्रालय (DAC) द्वारा पिछले हफ्ते ही इस ₹3.25 लाख करोड़ की डील को मंजूरी देने के बाद आया है।
‘मेक इन इंडिया’ और नौकरियों पर जोर
राष्ट्रपति मैक्रों ने इस बात पर खास जोर दिया कि फ्रांस राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण में अधिक से अधिक भारतीय पुर्जों का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। मैक्रों ने कहा, “हम चाहते हैं कि राफेल के ज्यादातर महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण भारत में ही हो, जैसा हमने टाटा-एयरबस डील में किया था। आप हम पर पूरा भरोसा कर सकते हैं।”
#WATCH | Delhi | On India to buy 114 French Rafale jets, French President Emmanuel Macron says, "… We are always increasing indigenous components. It's part of the dialogue between the company and your government. I don't see how people can criticise because it makes your… pic.twitter.com/detQEPAt48
— ANI (@ANI) February 19, 2026
मैक्रों ने यह भी बताया कि यह डील न केवल भारत को सुरक्षा के लिहाज से मजबूत बनाएगी, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
फ्री स्पीच और नफरती भाषण पर खरी-खरी
समिट के दौरान मैक्रों ने अभिव्यक्ति की आजादी (Free Speech) पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह फ्री स्पीच में विश्वास तो रखते हैं, लेकिन इसका मतलब सम्मान और पारदर्शिता से होना चाहिए।
मैक्रों ने सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर निशाना साधते हुए कहा, “कई लोग पारदर्शिता के बिना और राजनीतिक एजेंडे के तहत फ्री स्पीच का बचाव करते हैं। जब लोग नफरत फैलाने वाले भाषणों (Hate Speech) और नस्लीय टिप्पणियों (Racist Speech) को बढ़ावा देते हैं, तो वह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं रह जाती।”
रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
मैक्रों ने साफ कर दिया कि राफेल डील केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत और फ्रांस के बीच अटूट भरोसे का प्रतीक है। उनके मुताबिक, इस डील का व्यावसायिक पक्ष दसॉल्ट एविएशन और भारत सरकार के बीच का आपसी मामला है और इसका उद्देश्य भारत की सुरक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मिली हरी झंडी के बाद, अब इस डील के जरिए भारत की वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ने वाली है।

