माँ भद्रकाली की ब्रॉन्ज की मूर्ति से लेकर कार्तिकेय-नंदी की पत्थर की प्रतिमा तक: PM मोदी के दौरे के साथ ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटेंगी चोरी हुईं भारत की 3 प्राचीन कलाकृतियाँ

ऑस्ट्रेलिया भारत को उसकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी तीन बेहद जरूरी प्राचीन मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ वापस सौंपने जा रहा है। इनमें देव भद्रकाली के साथ ब्रॉन्ज का एक त्रिशूल, ग्रेनाइट पत्थर से बनी नंदी की प्रतिमा और काले पत्थर (बेसाल्ट) पर बनी 6 मुख वाले भगवान कार्तिकेय की दुर्लभ मूर्ति शामिल है।

ये सभी प्राचीन कलाकृतियाँ कई साल पहले तमिलनाडु के पुराने मंदिरों से चोरी होकर बाहर ले जाई गई थीं। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इनका संबंध 11वीं और 12वीं शताब्दी से है और ये भारत की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर का अहम हिस्सा हैं।

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में ऑस्ट्रेलिया यात्रा और भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सामने आया। संस्कृति मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि ऑस्ट्रेलिया का यह कदम दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों और आपसी विश्वास को और गहरा करता है। मंत्रालय ने इसे भारत की प्राचीन विरासत के सम्मान और दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृति सहयोग का प्रतीक बताया।

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देवी भद्रकाली वाला ब्रॉन्ज का त्रिशूल: यह एक धार्मिक ब्रॉन्ज का त्रिशूल है, जिसके ऊपर देवी भद्रकाली की आकृति बनी हुई है। भद्रकाली को शक्ति का उग्र रूप माना जाता है। शैव और शक्ति परंपरा में यह त्रिशूल सुरक्षा, दिव्य शक्ति और बुराई पर जीत का प्रतीक माना जाता है। इस कलाकृति को दक्षिण भारत की पारंपरिक धातु शिल्प कला के अनुसार बनाया गया है।

नंदी की पत्थर की प्रतिमा: नंदी भगवान शिव के वाहन और सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं। यह प्रतिमा तमिलनाडु की पारंपरिक शैव मंदिर शैली में बनाई गई है। इसमें नंदी को बैठे हुए रूप में दिखाया गया है और उनके गले में घंटियाँ और फूलों की मालाएँ पहनाई गई हैं। मंदिरों में ऐसी प्रतिमा आमतौर पर गर्भगृह की ओर मुख करके स्थापिक की जाती हैं। यह भक्ति, शक्ति और धर्म का प्रतीक मानी जाती है।

ये दोनों ही प्राचीन कलाकृतियाँ तमिलनाडु के तिरवरूर जिले के कोल्लुमंगुडी स्थित श्री काशी विश्वनाथस्वामी मंदिर की हैं। इस मंदिर का निर्माण 13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच चोल, विजयनगर और नायक शासकों के समय हुआ था।

6 मुख वाले भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा: यह पत्थर की दुर्लभ प्रतिमा भगवान कार्तिकेय की है, जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन या षण्मुख भी कहा जाता है। प्रतिमा में भगवा कार्तिकेय के 6 मुख और 12 भुजाएँ दिखाई गई हैं। उनके हाथों में भाला सहित कई हथियार हैं और उनके साथ उनका वाहन मोर भी दिखाया गया है। यह प्रतिमा साहस, बुद्धिमत्ता और दिव्य सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।

इस मूर्ति को चोल काल की प्रसिद्ध शिल्पकला शैली में बनाया गया है जो अपनी बारीक नक्काशी और सुंदर बनावट के लिए जानी जाती है। यह प्रतिमा तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मनमबाड़ी गाँव स्थित नागनाथस्वामी मंदिर की है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल में हुआ था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन अनमोल प्राचीन कलाकृतियों को भारत को लौटाने के फैसले के लिए ऑस्ट्रेलिया एंथनी अल्बनीज का धन्यवाद किया। यह प्रक्रिया भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत पूरी की जाएगी। फिलहाल ये तीनों कलाकृतियाँ ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित रखी गई हैं।