मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर नियंत्रक एवँ महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। विधानसभा में पेश 2018 से 2023 की इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के 20 जिलों में करीब 77 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन को नियमों की अनदेखी करते हुए वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया गया।
जाँच में सामने आया कि 81 मामलों में से 33 संपत्तियाँ वास्तव में सरकारी थीं, जिन पर स्कूल, पुलिस थाने, वन भूमि और यहाँ तक कि बैंक में गिरवी रखी जमीन भी शामिल है। इस पूरे प्रकरण ने वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी जमीन पर ‘वक्फ’ की मुहर, स्कूल, थाना और वन भूमि तक शामिल
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 33 संपत्तियों को गलत तरीके से वक्फ घोषित किया गया, उनका कुल क्षेत्रफल दो लाख वर्ग मीटर से अधिक है। राजस्व अभिलेखों में ये जमीनें राज्य सरकार के नाम दर्ज थीं और सामुदायिक उपयोग के लिए आरक्षित थीं। इसके बावजूद बिना समुचित जाँच और आवश्यक अनुमतियों के इन्हें औकाफ रजिस्टर में शामिल कर लिया गया।
कई मामलों में जिला कलेक्टरों को आपत्तियों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसे CAG ने ‘शिथिल प्रशासनिक रवैया’ बताया है। सबसे चौंकाने वाला मामला भोपाल के मिसरोद क्षेत्र का है, जहाँ 3,600 वर्ग मीटर जमीन को कब्रिस्तान बताते हुए वक्फ संपत्ति दर्ज कर दिया गया, जबकि उसी जमीन पर सरकारी स्कूल और थाना संचालित हैं।
इसी तरह विदिशा जिले में हलाली डैम क्षेत्र की वन भूमि, सीहोर में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन और रायसेन में बैंक के पास गिरवी रखी भूमि को भी वक्फ के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। कई जगह स्थानीय लोगों और प्रशासन ने आपत्तियाँ दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
निजी और उत्तराधिकार भूमि पर भी विवाद
ऑडिट में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में निजी स्वामित्व वाली और उत्तराधिकार से जुड़ी जमीनों को भी वक्फ संपत्ति बना दिया गया। मंदसौर और शिवपुरी जैसे जिलों में ऐसे उदाहरण मिले, जहाँ वैध स्वामित्व और कानूनी उत्तराधिकार की अनदेखी कर पंजीकरण कर दिया गया।
CAG ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आदेशों के जरिए स्वामित्व में मनमाना बदलाव नहीं किया जा सकता और यह कानून के खिलाफ है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को जाँच के आदेश दिए हैं और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
वहीं वक्फ बोर्ड ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह किसी की जमीन पर अवैध कब्जा नहीं करना चाहता और रिपोर्ट के बिंदुओं की जाँच करेगा। CAG ने अपनी सिफारिशों में वक्फ अधिकारियों, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। CAG की यह रिपोर्ट वक्फ पंजीकरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

