गुजरात के नाडियाड शहर में हुए धर्मांतरण मामले के मुख्य आरोपित स्टीवन मैकइवान के बारे में पुलिस की जाँच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जाँच में पता चला है कि इस रैकेट को विदेशों से फंडिंग मिल रही थी और ये लोग गरीब और भोले-भाले जनजातीय लोगों को लालच देकर धर्मांतरण करवा रहे थे।
जाँच में सामने आई मुख्य बातें
पुलिस ने बताया कि स्टीवन मैकइवान और उसके संगठन, ‘रेस्टोरेशन-रिवाइवल फाउंडेशन ट्रस्ट‘, द्वारा बड़े पैमाने पर गैरकानूनी धर्मांतरण का रैकेट चलाया जा रहा था। पुलिस ने विदेशी फंडिंग मिलने की पुष्टि की है। पिछले तीन सालों में आरोपितों के खातों में करीब 1 करोड़ 33 लाख 99 हजार रुपए का लेन-देन हुआ है।
स्टीवन खास तौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को निशाना बनाता था। वह उन्हें आर्थिक मदद का लालच देता था, चमत्कार का झाँसा देता था और उनकी अशिक्षा का फायदा उठाकर उन्हें ईसाई कबूल करने के लिए मजबूर करता था।
धर्मांतरण का तरीका
स्टीवन मैकइवान पहले लोगों से करीबी बढ़ाता था। स्टीवन के संपर्क वाले पादरी प्रार्थना के नाम पर गैर-पंजीकृत जगहों पर लोगों को इकट्ठा करते थे, जहाँ उन्हें धर्मांतरण के फायदों के बारे में बताया जाता था। इसके बाद स्टीवन उनका ब्रेनवॉश करके धर्मांतरण करवाता था।
यह रैकेट केवल नाडियाड तक सीमित नहीं था। आरोपित गुजरात (तापी, नर्मदा, भरूच, आनंद) के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे कई राज्यों से अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को निशाना बना रहे थे।
सबूत बरामद
स्टीवन के फोन से 1.57 लाख से ज़्यादा वीडियो और तस्वीरें बरामद हुई हैं, जिनमें धर्मांतरण की पूरी प्रक्रिया दर्ज है। फोरेंसिक जाँच (FSL) के बाद इन सबूतों की पड़ताल की जा रही है। जाँच में स्टीवन के खाते से पादरियों के साथ हुए पैसों के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।
पुलिस अब स्टीवन मैकइवान के बैंक लेन-देन और उसने कितने लोगों का धर्मांतरण कराया, इन सभी पहलुओं की गहराई से जाँच कर रही है। साथ ही, यह भी पता चला है कि इस ट्रस्ट का ऑडिट भी ठीक से नहीं किया जाता था, जिसकी रिपोर्ट चैरिटी कमिश्नर को दी गई है।

