बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक अहम फैसले सुनाते हुए कहा कि नाबालिग बच्ची का हाथ पकड़कर उसे पैसे देने का प्रस्ताव और उससे यौन संबंध बनाने का संकेत देना, प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न माना जाएगा।
जस्टिस निवेदिता पी मेहता ने उक्त मामले में आरोपित शेख रफीक शेख गुलाब की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसी हरकतें स्पष्ट रूप से आरोपित के यौन इरादे को दर्शाती हैं। उन्होंने यवतमाल सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई 3 साल की सजा को सही ठहराया।
यह मामला अक्टूबर 2015 का है, जब लगभग 13 वर्षीय पीड़िता के घर उसके पड़ोसी शेख रफीक ने दो बार जाकर 50 रुपए का लालच देकर उससे एक गेम खेलने की बात कही। पहली बार पीड़िता कुछ नहीं समझ पाई लेकिन दूसरी बार रफीक ने उसका हाथ पकड़कर पैसे देने की बात दोहराई थी।
बच्ची ने हाथ छुड़ाकर तुरंत अपने मामा को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद FIR दर्ज हुई। सुनवाई के दौरान आरोपित की ओर से तर्क दिया गया कि केवल हाथ पकड़ना अपराध नहीं है लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि POCSO एक्ट बच्चों को ऐसे किसी भी यौन उद्देश्य वाले व्यवहार से सुरक्षा देता है।

