भारत ने गुरुवार (5 फरवरी 2026) को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की शर्तों पर हस्ताक्षर किए, जिससे 2004 से रुकी वार्ता फिर शुरू हो गई है। जीसीसी में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “छह देशों के जीसीसी समूह के साथ समझौता हमारे संबंधों को भू-राजनीतिक और व्यापारिक दोनों मोर्चों पर और मजबूत करेगा, अधिक मात्रा में निवेश आकर्षित करने में मदद करेगा, जीसीसी देशों और भारत दोनों में रोजगार के अवसर सृजित करेगा, खाद्य सुरक्षा तथा ऊर्जा सुरक्षा को प्रोत्साहित करेगा और दुनिया को हमारे गहरे रिश्तों तथा ऐतिहासिक मित्रतापूर्ण संबंधों का संदेश देगा।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और जीसीसी के एकजुट होने से हम वैश्विक भलाई के लिए एक बल गुणक बन जाएँगे। गोयल ने यह भी बताया कि जीसीसी एफटीए भारत को ऊर्जा स्रोतों में और अधिक विविधीकरण तथा वृद्धि प्रदान करने में सहायक होगा।
साल 2004 में फ्रेमवर्क समझौते के बाद 2006 और 2008 में दो दौर की वार्ता हुई थी, लेकिन 2011 में जीसीसी ने सभी देशों से बातचीत रोक दी थी। नवंबर 2022 में जीसीसी महासचिव की भारत यात्रा से वार्ता फिर शुरू हुई और अक्टूबर 2023 में संशोधित शर्तें साझा की गईं।
वित्त वर्ष 2025 में भारत और जीसीसी के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर था, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15.42 प्रतिशत है। यूएई के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा जीसीसी व्यापार साझेदार है।
भारत के प्रमुख आयात कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस हैं, जबकि निर्यात में मोती, कीमती पत्थर, धातु, नकली आभूषण, विद्युत मशीनरी, लोहा-इस्पात और रसायन शामिल हैं। खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढाँचा, पेट्रोकेमिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।
भारत ने पहले ही जीसीसी के दो सदस्य देशों यूएई और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए हैं और कतर के साथ भी एफटीए वार्ता चल रही है। यूएई भारत में आने वाली रेमिटेंस में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।

