भारत ने रिकॉर्ड 256 GW बिजली माँग को बिना शॉर्टेज किया पूरा, सोलर पावर बना सप्लाई का बड़ा आधार

भारत ने हाल ही में अपनी अब तक की सबसे ज्यादा बिजली माँग को बिना किसी कटौती के पूरा कर लिया। खास बात यह रही कि इस बार सिर्फ कोयले पर निर्भरता नहीं रही बल्कि सोलर एनर्जी ने भी बड़ी भूमिका निभाई।

शनिवार (25 अप्रैल 2026) को देश में 256 गीगावाट से ज्यादा बिजली की माँग दर्ज हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। इसके बावजूद न तो बिजली की कमी हुई और न ही सप्लाई में कोई रुकावट आई। बल्कि भारत ने पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी जारी रखा। यह संकेत है कि देश का ऊर्जा सिस्टम अब धीरे-धीरे साफ और टिकाऊ स्रोतों की तरफ बढ़ रहा है।

रिकॉर्ड डिमांड में सोलर का बड़ा योगदान

इस बार की सबसे खास बात यह रही कि कुल बिजली माँग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा हुआ। इसमें सोलर एनर्जी का योगदान तेजी से बढ़ा है। शनिवार (25 अप्रैल 2026) को दोपहर करीब 12:30 बजे सोलर पावर जनरेशन लगभग 81 गीगावाट तक पहुँच गया, जो उस समय की कुल बिजली का बड़ा हिस्सा था। पीक डिमांड के समय भी सोलर ने करीब 57 गीगावाट बिजली दी।

हालाँकि, अभी भी थर्मल पावर (कोयला आधारित) का हिस्सा करीब 66% है लेकिन सोलर का 21% योगदान दिखाता है कि बदलाव शुरू हो चुका है। अब सोलर सिर्फ बैकअप नहीं बल्कि मुख्य स्रोत बनता जा रहा है, खासकर दिन के समय जब गर्मी की वजह से बिजली की खपत ज्यादा होती है।

गर्मी बढ़ी तो जल्दी बढ़ गई बिजली की खपत

आमतौर पर भारत में बिजली की सबसे ज्यादा माँग जून-जुलाई में होती है लेकिन इस बार अप्रैल में ही रिकॉर्ड बन गया। इसकी सबसे बड़ी वजह है बढ़ती गर्मी। इस साल तापमान जल्दी बढ़ने से घरों और दफ्तरों में AC, कूलर और पंखों का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा।

पिछले साल अप्रैल में जहाँ पीक डिमांड करीब 235 गीगावाट थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 256 गीगावाट पहुँच गई। कुल बिजली खपत भी अप्रैल में लगभग 9% बढ़ी है। सरकार का अनुमान है कि आने वाले महीनों में यह माँग 271 गीगावाट तक पहुँच सकती है, जिससे पावर ग्रिड पर दबाव और बढ़ेगा।

सरकार की योजनाओं से सोलर को मिल रहा बढ़ावा

भारत में सोलर एनर्जी का विस्तार सरकार की योजनाओं की वजह से तेजी से हो रहा है। 2026 तक देश में 150 गीगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है, जो इसे सबसे तेजी से बढ़ने वाला ऊर्जा स्रोत बनाता है।

सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का लक्ष्य है, जिससे लोगों को सस्ती या मुफ्त बिजली मिल सके। वहीं PM-KUSUM योजना के जरिए किसानों को सोलर पंप और छोटे प्लांट दिए जा रहे हैं, जिससे 21 लाख से ज्यादा किसान लाभ उठा चुके हैं।

इसके अलावा देश में ही सोलर उपकरण बनाने के लिए PLI योजना भी चलाई जा रही है। बड़े सोलर पार्क और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से भी इस सेक्टर को मजबूती मिल रही है।  भारत ने जिस तरह रिकॉर्ड बिजली माँग को बिना किसी संकट के पूरा किया, वह दिखाता है कि अब सोलर एनर्जी देश की ऊर्जा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है।

आने वाले समय में जब बिजली की माँग और बढ़ेगी, तब यही संतुलन कोयला और रिन्यूएबल के बीच देश को लगातार बिजली देने में मदद करेगा। धीरे-धीरे भारत साफ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।