भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा 6 साल बाद फिर से शुरू होने जा रही है, लेकिन इस बीच नेपाल ने अड़ंगा डाल दिया है। नेपाल की नई बालेन शाह सरकार ने दावा किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा का क्षेत्र उसका अभिन्न हिस्सा है, इसीलिए वहाँ से गुजरना नेपाल के कानून के खिलाफ है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर भारत और चीन को इस स्थिति से अवगत कराया। बयान में कहा गया कि नेपाल सरकार अपने इस रुख पर पूरी तरह से कायम है कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी 1816 की सुगौली संधि के आधार पर उसके अविभाज्य क्षेत्र हैं।
नेपाली भूमि लिपुलेक हुँदै कैलाश मानसरोवर यात्राका विषयमा मिडियाबाट सोधिएका प्रश्नका सम्बन्धमा परराष्ट्र प्रवक्ताको जवाफ
— MOFA of Nepal 🇳🇵 (@MofaNepal) May 3, 2026
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मंत्रालय ने यह भी कहा, “नेपाल औऱ भारत के बीच घनिष्ठ व मैत्रीपूर्ण संबंधों को देखते हुए नेपाल सरकार ऐतिहासिक समझौते, तथ्यों, नक्शों और सबूतों के आधार पर राजनयिक माध्यम से सीमा मुद्दे को हल करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
भारत का रुख
नेपाल के इस दावे को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर नेपाल की आपत्ति को खारिज कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “इस मामले में भारत का रुख हमेशा स्पष्ट और एक जैसा रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पारंपरिक मार्ग रहा है और इस रास्ते से यात्रा दशकों से जारी है। यह कोई नई बात नहीं है।”
Our response to media queries regarding comments made by Foreign Ministry of Nepal on border issue in the context of the Kailash Mansarovar Yatra ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) May 3, 2026
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उन्होंने यह भी कहा, “जहाँ तक क्षेत्रीय दावों का सवाल है, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो उचित हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित हैं। इस तरह के एकतरफा दावों का विस्तार स्वीकार्य नहीं है। भारत नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है, जिसमें लंबित सीमा विवादों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाना भी शामिल है।”
नेपाल के साथ कालापानी और लिपुलेख को लेकर विवाद
बता दें कि नेपाल के साथ लिपुलेख और कालापानी पर विवाद तब से जारी है, जब साल 2020 में नेपाल की तत्कालीन केपी ओली की सरकार ने लिपुलेख और कालापनी समेत इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया था। यह नक्शा उस समय दिखाया गया, जब भारत ने धारचूला को लिपुलेख से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था, जो तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग है।

