भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली सालगिरह पर दुनिया को कड़ा संदेश दिया है। सैन्य अधिकारियों ने साफ किया कि भारत अब आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। सेना ने इसे देश की रक्षा नीति का सबसे बड़ा बदलाव बताया और कहा कि भविष्य में भी किसी भी चुनौती का जवाब इसी तरह पूरी ताकत से दिया जाएगा।
तीनों सेनाओं ने मिलकर तोड़ी आतंकियों की कमर
इस मिशन में थल सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर काम किया। वायुसेना ने आतंकियों के ठिकानों पर सटीक निशाने लगाए, तो वहीं नौसेना ने समुद्र में युद्धपोत और पनडुब्बियाँ तैनात कर पाकिस्तान पर भारी दबाव बना दिया। अधिकारियों ने इसे सैन्य तालमेल का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड‘ यानी सबसे बेहतरीन उदाहरण बताया। इसी दबाव की वजह से अंत में पाकिस्तान को हार मानकर बातचीत और शांति की भीख मांगनी पड़ी थी।
DGMO Lt Gen Rajiv Ghai quotes Dushyant Kumar tyagi's famous war poem 🇮🇳 pic.twitter.com/cwVNrC4iPx
— INTEL-24 (@Tracking_Live) May 7, 2026
‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल राजीव घई ने दुष्यंत कुमार की मशहूर कविता पढ़ते हुए कहा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए।” उन्होंने साफ किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कोई अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। इसका मतलब है कि अगर भविष्य में किसी ने भारत की तरफ आंख उठाकर देखी, तो सेना फिर से घर में घुसकर मारने के लिए तैयार है।
हर मोर्चे पर मुस्तैद भारतीय जवान
सेना के बड़े अफसरों ने भरोसा दिलाया कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमारी तीनों सेनाएं (जल, थल और नभ) हर समय अलर्ट पर हैं। भारत अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा। अब भारत आतंकवाद के खिलाफ पुरानी और नरम नीतियों को छोड़कर सीधा और निर्णायक प्रहार करने की नीति पर चल पड़ा है।
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और क्यों हुआ?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस ऑपरेशन में सेना ने सीमा पार (POK) जाकर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के अड्डों को तबाह कर दिया था। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने सेना को पूरी छूट दी थी, जिससे यह कार्रवाई बेहद सटीक और सफल रही।

