भारत सरकार ने चार नए लेबर कोड (श्रम कानून) लागू करके देश के श्रम इतिहास में बड़ा बदलाव किया है। इन कोड्स से न केवल पुराने नियमों को बदला गया है, बल्कि पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों को कानूनी पहचान दी गई है।
अब डिलीवरी करने वाले और कैब चलाने वाले वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा, हेल्थ इंश्योरेंस और वेलफेयर फंड जैसे अधिकार मिलेंगे। यह कदम तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और आधुनिक वर्कफोर्स को सुरक्षा देने के लिए उठाया गया है।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिली सुरक्षा
डिजिटल इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने को देखते हुए, सरकार ने पहली बार गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर) और प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों को कानूनी मान्यता दी है। अब एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर) को अपनी सालाना कमाई का एक तय हिस्सा इन वर्कर्स के कल्याण कोष (वेलफेयर फंड) में देना होगा।
इससे डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े वर्कर्स को उनके अधिकार साफ तौर पर मिलेंगे और उनके भविष्य के लिए सुरक्षा पुख्ता होगी। आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर की व्यवस्था से सभी लाभ पोर्टेबल हो जाएँगे। यानी, नौकरी या शहर बदलने पर भी वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा लाभ रुकेंगे नहीं। यह बदलाव नए रोजगार मॉडलों को औपचारिक ढाँचे में लाता है।
सभी कामगारों के अधिकार और लाभ बढ़े
इन लेबर कोड्स से देश के सभी कामगारों के अधिकार बढ़े हैं। देश के सभी वर्कर्स को अब PF (प्रोविडेंट फंड), ESIC (हेल्थ स्कीम), और इंश्योरेंस जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ अनिवार्य रूप से मिलेंगे। महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति और सभी क्षेत्रों में समान अवसर दिए गए हैं।
अब केवल एक साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी मिल सकेगी। साथ ही, समय पर सैलरी देना अब कानूनन अनिवार्य हो गया है। फिक्स्ड-टर्म पर काम करने वाले अस्थाई कर्मचारियों को भी अब स्थायी कर्मचारियों जैसी छुट्टियाँ, मेडिकल और सामाजिक लाभ मिलेंगे।

