उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास पर पहुँचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार (17 फरवरी 2026) को एक सद्भावना बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जनसंख्या, धर्म, घुसपैठ और UGC गाइडलाइंस जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहन भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू ही हैं, वे किसी अरब देश से नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए और जो लोग हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनका ध्यान रखना भी समाज की जिम्मेदारी है।
बढ़ती घुसपैठ पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि घुसपैठियों को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। वहीं, हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर चिंता जताते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान जनसंख्या दर 2.1 है जबकि यह कम से कम 3 होनी चाहिए। उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से अपील की कि वे कम से कम तीन बच्चे पैदा करें।
वहीं, संघ प्रमुख ने UGC गाइडलाइंस पर कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। अगर कोई कानून गलत लगता है तो उसे बदलने का तरीका भी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समाज को जातीय झगड़ों में नहीं उलझना चाहिए। कुछ लोगों को यह नियम अपने खिलाफ लगता है जबकि कुछ को अपने पक्ष में। सरकार नियम बनाती है, और असहमति होने पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। संघर्ष नहीं, समन्वय से समाज आगे बढ़ता है।
भागवत ने सामाजिक समरसता पर बात रखते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति गड्ढे में गिरा है, तो बाहर निकलने के लिए उसे खुद भी प्रयास करना होगा और बाहर खड़े व्यक्ति को भी झुककर उसे सहारा देना होगा। उनका कहना था कि समाज में संवाद और सहयोग दोनों पक्षों से होना जरूरी है। वहीं, उन्होंने जाति व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को जातिगत भेदभाव और विभाजन से ऊपर उठकर एकता और आपसी विश्वास की भावना मजबूत करनी चाहिए।

