रेल हादसों पर फुल स्टॉप लगा रही मोदी सरकार, 1 ही दिन में 472 KM के ट्रैक पर लगाया कवच 4.0 सिस्टम: जानें- कैसे इमरजेंसी के समय खुद रुक जाएँगी ट्रेनें

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। रेलवे ने अपने नेटवर्क के तीन सबसे महत्वपूर्ण रूटों पर करीब 472 किलोमीटर हिस्से में ‘कवच 4.0’ (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।

यह पहली बार है जब एक ही दिन और एक ही महीने में इतनी बड़ी दूरी को इस अत्याधुनिक सुरक्षा सिस्टम से लैस किया गया है। अब कवच 4.0 देश के पाँच अलग-अलग रेलवे जोनों में काम कर रहा है, जिससे कुल 1,306 रूट किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।

दिल्ली-मुंबई रूट पर सुरक्षा का ‘हाई-टेक’ पहरा

उत्तर रेलवे के तहत आने वाले दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के सबसे व्यस्त हिस्से, तुगलकाबाद से पलवल (35 किमी) के बीच अब कवच 4.0 तैनात हो गया है। यह रूट इसलिए खास है क्योंकि यहाँ से हर दिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस ट्रेनें और भारी मालगाड़ियाँ गुजरती हैं।

रेलवे ने यहाँ स्टेशन यार्ड और सिग्नलिंग सिस्टम को कवच के साथ जोड़ दिया है। इससे हाई-ट्रैफिक वाले इस इलाके में मानवीय भूल के कारण होने वाली टक्करों का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा और ट्रेनों का संचालन पहले से कहीं ज्यादा भरोसेमंद होगा।

बिहार-झारखंड रूट पर ‘सासाराम इंटरसिटी’ ने भरी पहली सुरक्षित उड़ान

पूर्व मध्य रेलवे के मानपुर-सरमाटनर सेक्शन (93.3 किमी) पर भी कवच 4.0 का जलवा देखने को मिला। यहाँ ट्रेन नंबर 13305 सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस कवच सिस्टम के साथ चलने वाली पहली ट्रेन बनी।

परीक्षण के दौरान रेलवे ने दो ट्रेनों को आमने-सामने लाकर ‘कोलिजन टेस्ट’ भी किया, जिसमें सिस्टम ने खतरे को भांपते हुए ट्रेन को अपने आप रोक दिया। यह पूरा इलाका दिल्ली-हावड़ा मेन रूट का हिस्सा है, जहाँ भविष्य में ट्रेनों को 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की तैयारी है।

मुंबई से शुरू हुआ ‘कवच’ का सफर, दादर-भुज एक्सप्रेस बनी गवाह

पश्चिम रेलवे के वडोदरा–सूरत–विरार के बीच 344 किलोमीटर लंबे सेक्शन में इस सिस्टम की शुरुआत एक ऐतिहासिक कदम है। मुंबई से चलने वाली दादर-भुज सायाजी नगरी एक्सप्रेस कवच 4.0 से लैस होने वाली पहली ट्रेन बन गई है।

रेलवे का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक वडोदरा-नगदा सेक्शन और सितंबर 2026 तक मुंबई सेंट्रल तक के पूरे हिस्से को इस सुरक्षा कवच से जोड़ दिया जाए। अब तक पश्चिम रेलवे के करीब 364 इंजनों में यह सिस्टम फिट किया जा चुका है।

क्या है कवच 4.0 और यह कैसे बचाता है जान?

कवच वर्जन 4.0 पूरी तरह से भारत में बना (स्वदेशी) सिस्टम है। इसे दुनिया के सबसे ऊँचे सुरक्षा मानकों पर तैयार किया गया है। यह जीपीएस और रेडियो तकनीक की मदद से ट्रेन की स्पीड पर नजर रखता है। अगर ट्रैक पर आगे कोई दूसरी ट्रेन खड़ी है या लोको पायलट गलती से लाल सिग्नल पार करता है, तो यह सिस्टम तुरंत लोको पायलट को चेतावनी देता है। अगर पायलट ब्रेक नहीं लगा पाता, तो ‘कवच’ खुद-ब-खुद ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है, जिससे बड़ी दुर्घटनाएँ टल जाती हैं।