‘स$#ले, काफिर, मुस्लिम की शिकायत करेगा?’: जामिया में प्रोफेसर रियाजुद्दीन ST कर्मचारी पर बनाता था धर्मांतरण का दबाव, कंप्लेन करने पर पिटाई और ट्रांसफर

जामिया मिलिया इस्लामिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यूनिवर्सिटी के पॉलिटेक्निक विभाग में काम करने वाले जनजातीय समुदाय के क्लर्क राम फूल मीणा ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रियाजुद्दीन पर मारपीट और जातिसूचक गालियाँ देने का बेहद संगीन आरोप लगाया है।

क्लर्क राम फूल मीणा का कहना है कि एक छात्रा से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद प्रोफेसर ने उन्हें निशाना बनाया, उन्हें लात-घूँसों से पीटा और ‘काफिर’ व ‘जंगली’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। ताज्जुब की बात यह है कि शिकायत करने पर प्रशासन ने प्रोफेसर पर एक्शन लेने के बजाय पीड़ित कर्मचारी का ही तबादला कर दिया।

‘मुस्लिमों के संस्थान में रहने की हिम्मत कैसे हुई?’

ऑर्गेनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित राम फूल मीणा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 16 जनवरी को प्रोफेसर रियाजुद्दीन उनके केबिन में आए और उनके जनजातीय (ST) होने पर भद्दे कमेंट्स किए। आरोप है कि प्रोफेसर ने चिल्लाते हुए कहा, “तुम साले जंगली हो, मुसलमानों के संस्थान में रहकर मेरे खिलाफ शिकायत करने की जुर्रत कैसे की?”

इसके बाद प्रोफेसर ने उन्हें कई घूंसे मारे, जिससे उनके चेहरे पर सूजन आ गई और होंठ से खून निकलने लगा। मीणा ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर लंबे समय से धर्मांतरण का दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें बार-बार ‘काफिर’ कहकर अपमानित किया जाता था।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

यह सारा झगड़ा एक वीडियो के वायरल होने के बाद शुरू हुआ, जिसमें प्रोफेसर के जरिए छात्रों को प्रताड़ित करने की बात कही गई थी। क्लर्क मीणा का आरोप है कि उन्हें शक के आधार पर निशाना बनाया गया।

13 जनवरी को भी प्रोफेसर ने उनके डेस्क पर आकर जातिसूचक शब्द कहे थे। जब उन्होंने विरोध किया, तो मामला मारपीट तक पहुँच गया। मीणा ने बताया कि उन्होंने रजिस्ट्रार को शिकायत दी थी, लेकिन वहाँ से उनकी शिकायत लीक कर दी गई, जिससे प्रोफेसर और भड़क गए।

इंसाफ के बदले मिला ट्रांसफर का फरमान

इस मामले में जामिया प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मारपीट के बाद जब पीड़ित मीणा अपने प्रिंसिपल के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे, तो उन्हें भरोसा दिया गया कि कार्रवाई होगी। लेकिन उसी शाम उनके हाथ में ट्रांसफर का ऑर्डर थमा दिया गया।

क्लर्क मीणा ने इसे ‘सजा के तौर पर किया गया तबादला’ बताया है। अब उन्होंने दिल्ली पुलिस से SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की माँग की है। बता दें कि जामिया में जबरन धर्मांतरण और गैर-मुस्लिमों से भेदभाव के आरोप पहले भी कई बार लग चुके हैं।

धर्मांतरण के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण

पुलिस ने इस पूरे मामले में ‘धर्मांतरण’ (Conversion) के किसी भी एंगल से पूरी तरह इनकार किया है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि शिकायतकर्ता के जरिए दर्ज कराई गई रिपोर्ट में जबरन धर्मांतरण के प्रयास जैसा कोई भी आरोप नहीं लगाया गया है।

पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर चल रही धर्मांतरण की खबरें पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद हैं। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। फिलहाल पुलिस सबूत इकट्ठा करने और बयान दर्ज करने की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

(नोट: यह खबर अपडेट की गई है पुलिस बाइट आने के बाद)