जब गैंगरेप करके सड़क पर फेंकी गई हिंदू नर्स की क्षत-विक्षत लाश… सरला भट्ट केस में 36 साल बाद आतंकी यासीन मलिक समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट दायर, जानिए पूरा मामला

टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा जेकेएलएफ का पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ 36 साल बाद कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई हुई है। जम्मू-कश्मीर की एसआईए ने 36 साल पुराने मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें उसे मुख्य आरोपितों में शामिल किया है।

इसके तीन आरोपितों, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद युसूफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। चौथा आरोपित मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको फरार है और उसके पीओके में छिपे होने की आशंका है। सरला को उसी ने गोली मारी थी। चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके 4 साथियों ने अप्रैल 1990 में सरला भट्ट को अगवा किया और उसकी हत्या की साजिश रची।

सरला भट्ट कौन थी?

कश्मीरी पंडित सरला भट्ट उस वक्त श्रीनगर के शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। 36 साल पहले उनका अपहरण किया गया। उन्हें यातनाएँ दी गईं। बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। सरला अनंतगाग की रहने वाली थी।

18 अप्रैल 1990 को सरला ड्यूटी पर जा रही थीं। इसी दौरान अस्पताल परिसर के पास से उन्हें उठा लिया गया। चार दिन तक अलग-अलग जगह रख कर बुरी तरह टॉर्चर किया गया। बाद में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में मिला। शरीर पर गोलियों के साथ साथ उन यातनाओं के भी निशान थे, जो चार दिनों तक उन्हें दिए गए।

शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उसे ‘सुरक्षाबलों का मुखबिर’ होने की बात कही गई थी। इतना ही नहीं सरला के परिवार वालों पर भी जुल्म ढाए गए। उसके घर पर ग्रेनेड से हमला किया गया और कश्मीर से पलायन के लिए मजबूर किया गया। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि इस हत्या का उद्देश्य कश्मीरी पंडितों में भय पैदा करना था, ताकि उनका घाटी से पलायन तेज हो।

एसआईए ने 737 पन्नों की चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल की। इसमें यासीन मलिक सहित 5 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री तथा नई जाँच के आधार पर आरोप तय किए गए।

यासीन मलिक पर अब तक किन-किन मामलों में कार्रवाई हुई?

यासीन मलिक आतंकियों की फंडिंग का दोषी है। इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली है। NIA ने 2017 में यह मामला दर्ज किया था। उसने घाटी में अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए हवाला के जरिए धन जुटाया। 2022 में यासीन मलिक ने अदालत में कई आरोप स्वीकार किए। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

उसपर आतंकवाद, आपराधिक साजिश और UAPA के तहत भी कई मामले दर्ज हैं। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोप है।
इन मामलों में भी उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।

जनवरी 1990 में श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले के मामले में भी यासीन मलिक का नाम आया था।
इस मामले में भी NIA ने कार्रवाई की है और मुकदमा न्यायिक प्रक्रिया में है।

1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण के मामले में भी यासीन मलिक का नाम जाँच के दौरान आया। इस मामले में भी अदालत में मुकदमा चल रहा है और अंतिम फैसला नहीं आया है।

1990 के दशक में उनके खिलाफ कई FIR दर्ज हुई थीं। जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दर्जनों आपराधिक और आतंकवाद संबंधी मामले अलग-अलग वक्त पर दर्ज हुए हैं। इनमें से कुछ में वह दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि कुछ अभी भी न्यायालय में लंबित हैं।

फिलहाल यासीन मलिक आतंकवाद फंडिंग मामले में तिहाड़ में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। NIA ने उनकी सजा बढ़ाकर मृत्युदंड किए जाने की भी अपील की है, जिस पर उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है। सरला भट्ट हत्याकांड की नई चार्जशीट उनके खिलाफ एक अलग और महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई है, जिसकी सुनवाई आगे होगी।