झारखंड के धनबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हुई पत्थरबाजी और उसके बाद हिंदू आयोजकों के साथ पुलिस की बदसलूकी का मामला अब दिल्ली पहुँच गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए झारखंड के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को रस्सी से बाँधकर बाजार में घुमाने को मानवाधिकार का उल्लंघन माना है और 7 दिनों के भीतर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।

क्या है पूरा मामला?
मामला धनबाद के बलियापुर स्थित भीखराजपुर गाँव का है। आरोप है कि रामनवमी के जुलूस पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने अचानक पत्थरबाजी शुरू की, जिससे कई हिंदू श्रद्धालु घायल हो गए। इसके बाद वहाँ दो पक्षों में झड़प हो गई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को संभालने के बजाय दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन हिंदू आयोजकों के साथ जो व्यवहार किया गया, उसने अब तूल पकड़ लिया है।
झारखंड के धनबाद में रामनवमी शोभायात्रा में जिहादी तत्वों द्वारा पथराव की घटना बाद पुलिस द्वारा नियंत्रण के नाम पर आरोपितों के अलावा हिंदू श्रद्धालुओं और आयोजकों को रस्सी से बांध कर उनको अपमानित करने की शिकायत प्राप्त हुई है।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) April 1, 2026
हमने संज्ञान ले कर चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को नोटिस… pic.twitter.com/I7TjiV5w7E
सोशल मीडिया पर वायरल Video और शिकायत के मुताबिक, पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता शत्रुघ्न महतो और जुलूस के अन्य आयोजकों को कमर में रस्सी बाँधकर सरेआम बाजार में घुमाया। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला अध्यक्ष शशांक राज ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि पुलिस ने असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन लोगों को अपमानित किया जो धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगे थे।

मानवाधिकार आयोग ने जताई नाराजगी
NHRC के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि उन्हें इस मामले में शिकायत मिली थी, जिसमें श्रद्धालुओं को अपमानित करने की बात कही गई थी। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया ‘मानवीय गरिमा का हनन’ और ‘सत्ता का दुरुपयोग’ माना है। अब झारखंड सरकार को एक हफ्ते के अंदर यह बताना होगा कि पुलिस ने किसके आदेश पर और क्यों ऐसा अमानवीय व्यवहार किया।
वहीं, BJYM नेता शशांक राज का कहना है कि पुलिस का यह रवैया पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पत्थरबाजी दूसरे पक्ष की तरफ से हुई, तो फिर आयोजकों को अपराधियों की तरह सड़कों पर क्यों परेड कराया गया? फिलहाल इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश है और लोग दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

