‘₹50 हजार दो, तभी मिलेगी मैटरनिटी लीव’: झारखंड में भ्रष्ट व्यवस्था के कारण गर्भवती टीचर की कोख में हुई बच्चे की मौत, रोज 35km जाना पड़ता था ड्यूटी

झारखंड के पलामू जिले में एक गर्भवती शिक्षिका के साथ हुई दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। परिवार का आरोप है कि समय पर छुट्टी नहीं मिलने और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से शिक्षिका ने अपने अजन्मे बच्चे को खो दिया। वहीं, छुट्टी मंजूर करने के बदले ₹50 हजार रिश्वत माँगने का भी आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जाँच के आदेश दे दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिक्षिका भारती पांडेय पलामू जिले के तरहसी स्थित सिलदिलिया प्लस टू स्कूल में कार्यरत हैं। फिलहाल उनकी ड्यूटी चैनपुर के कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय में लगाई गई थी। परिवार का कहना है कि गर्भावस्था के आखिरी दिनों में भी उन्हें हर दिन करीब 35 किलोमीटर का सफर करके स्कूल जाना पड़ता था।

शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने 3 जुलाई को छुट्टी के लिए आवेदन किया था। उनका कहना है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार ने छुट्टी मंजूर करने के लिए ₹50 हजार माँगे। परिवार ने ₹25 हजार देने की बात भी कही, लेकिन इसके बाद भी छुट्टी नहीं मिली।

परिवार के मुताबिक, शनिवार (25 जुलाई 2026) को स्कूल में ड्यूटी के दौरान भारती पांडेय को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। तबीयत बिगड़ने पर वह जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय पहुँचीं और छुट्टी की माँग की। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि घटना से कुछ दिन पहले पलामू के उपायुक्त ने शिक्षा विभाग को छुट्टी के आवेदन पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अगर समय पर छुट्टी मिल जाती तो उनकी पत्नी को इतनी लंबी यात्रा और लगातार काम नहीं करना पड़ता, जिससे शायद यह हादसा टल सकता था।

हालाँकि, जिला प्रशासन का कहना है कि शिक्षिका ने मैटरनिटी लीव नहीं, बल्कि चाइल्ड केयर लीव के लिए आवेदन किया था। प्रशासन का दावा है कि आवेदन में गर्भावस्था का कोई जिक्र नहीं था। अधिकारियों के अनुसार, आवेदन पर प्रक्रिया चल रही थी और घटना वाले दिन ही उसे मंजूरी दे दी गई थी।

रिश्वत माँगने और छुट्टी देने में देरी के आरोपों को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। पलामू के उपायुक्त ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि छुट्टी देने में देरी क्यों हुई, रिश्वत माँगने के आरोप सही हैं या नहीं और कहीं अधिकारियों की लापरवाही तो इस घटना की वजह नहीं बनी।