‘नेहरू ने वंदे मातरम् को विदेशी आर्केस्ट्रा में गाए जाने लायक नहीं माना’: राज्यसभा में BJP नेता जेपी नड्डा ने कॉन्ग्रेस को जमकर घेरा, बोले- सरकार की नीयत पूर्व PM छवि बिगाड़ना नहीं

राज्यसभा में गुरुवार (11 दिसंबर 2025) को वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा जारी रही। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वंदे मातरम् पर चर्चा करते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर प्रहार किया।

नड्डा ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं दिया गया, जिसका वह हकदार था और इसके लिए तत्कालीन सरकार जिम्मेदार रही। उन्होंने साफ कहा कि सरकार की नीयत किसी पूर्व प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाने की नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने रखने की है।

नड्डा ने चर्चा के दौरान बार-बार यह दोहराया कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने परिस्थितियों के हिसाब से हमेशा अवसरवाद दिखाया है, माहौल अपने पक्ष में हो तो नेहरू युग का श्रेय लेती है और प्रतिकूल माहौल में जिम्मेदारी से बचती है।

वंदे मातरम् की अनदेखी पर नड्डा का तीखा बयान

जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए कहा कि जन गण मन को राष्ट्रीय गान बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन वंदे मातरम् के लिए ऐसा समान समय और महत्व नहीं दिया गया। उनके अनुसार, यह फैसला तत्कालीन नेतृत्व की झिझक और आपत्तियों को दिखाता है।

नड्डा ने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू ने 1937 में लिखे अपने पत्रों में वंदे मातरम् को ऑर्केस्ट्रा में गाए जाने के लायक नहीं बताया था, खासकर विदेशों में। नड्डा के मुताबिक, यह वही सोच थी जिसके कारण राष्ट्रीय गीत को उसका योग्य दर्जा नहीं मिलने दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने इसे भाषाई रूप से कठिन और औपचारिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए कम उपयुक्त बताया था।

भाजपा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् कोई साधारण गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कन रहा है। उन्होंने खुदी राम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के अंतिम शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि यह गीत भारत के त्याग और बलिदान की आत्मा को समेटे हुए है।

नड्डा ने यह भी ध्यान दिलाया कि ‘राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971’ में वंदे मातरम् के अपमान पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उस गीत की अनदेखी करने जैसा है।