जिस ‘मुस्लिम जांबाज’ के चलते हिंदुओं को छोड़ना पड़ा कश्मीर, वो फिर एक्टिव: रिपोर्ट, लश्कर के टारगेट किलिंग ग्रुप ने कहा- कश्मीरी पंडितों पर नजर, आगे दिक्कत होगी

घाटी में कश्मीरी पंडितों की आबादी ना के बराबर बची है। अब वो भी खौफ में जीवन जी रहे हैं। क्योंकि उन्हें भी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप TRF से जान से मारने की धमकियाँ मिल रही है। टारगेट किलिंग के लिए बनाया गया TRF का ऑपरेशनल मॉड्यूल ‘फाल्कन स्क्वाड’ के नाम से लेटर जारी किया है, जिसमें बचे हुए कश्मीरी पंडितों का हाल भी राहुल पंडित, माखन लाल बिंदू आदि जैसा करने की धमकी दी है। इसके अलावा 1990 के दशक में एक्टिव रहे ‘मुस्लिम जाँबाज’ फोर्स ने भी धमकियों के पोस्टर चस्पा किए हैं।

इन धमकियों से पहलगाम के पास मट्टन में रहने वाले करीब 300 कश्मीरी पंडित डरे हुए हैं। डर के मारे गाँव में शाम 4 बजे ही सन्नाटा पसर जाता है। पुलिस ने भी लोगों से किसी अनजान का फोन नहीं उठाने और अँधेरे में घर के बाहर ना निकलने की हिदायत दी है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि आतंकियों की धमकी को देखते हुए उन्हें भी जम्मू के विलेज डिफेंस गार्ड की तरह ट्रेनिंग और लाइसेंसी हथियार देने चाहिए।

फाल्कन स्क्वाड के धमकी भरे लेटर में क्या लिखा?

03 फरवरी 2026 को ‘फाल्क्न स्कवाड’ के नाम से जारी लेटर में कश्मीरी पंडितों को धमकी दी गई। लेटर में लिखा, “कश्मीरी पंडितों थोड़े फायदे के लिए बलि का बकरा मत बनो। पहले ही देख चुके हो कि इस रास्ते पर चलने का अंजाम जान गँवाना होता है। जैसा राहुल पंडित, माखन लाल बिंदू, मोहन लाल और बाकी के साथ हुआ था।”

लेटर में लिखा कि इन्हें भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन इन्होंने नजरअंदाज की। बचे हुए कश्मीरी पंडितों को कहा कि तुम उनकी तरह मत बनो, अपना नाम मरने वालों की लिस्ट में मत लिखवाओ।

‘फाल्कन स्क्वाड’ नाम से जारी लेटर (फोटो साभार: Dainik Bhaskar)

इसी के साथ लेटर में ‘RSS की सरकार’ का भी जिक्र करते हुए कहा गया कि RSS की सरकार ने लोकल कश्मीरियों को बदनाम करने के लिए तुम लोगों को इस्तेमाल किया है। अंतिम चेतावनी के तौर पर लेटर में कहा गया, “हमने काफी समय से कश्मीरी पंडितों को टारगेट करने से खुद को रोक रखा था क्योंकि कुछ कश्मीरी पंडितों के ग्रुप ने हमे भरोसा दिया था सरकार के हाथों में नहीं खेलेंगे।”

लेटर में धमकी दी गई कि कश्मीरी पंडितों की सभी एक्टिविटी पर उनकी नजर है और कहा कि अगर आने वाले दिनों में कोई दिक्कत होती है, तो मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाना।

‘मुस्लिम जांबाज’ फोर्स फिर एक्टिव, युवाओं का कर रहा ब्रेनवॉश

1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दौर में एक्टिव रहने वाले ग्रुप ‘मुस्लिम जांबाज’ एक बार फिर से घाटी में सक्रिय हो गया है। दिल्ली ब्लास्ट के बाद जनवरी 2026 के अंत में कुछ इलाकों में मुस्लिम जांबाज फोर्स के पोस्टर मिले थे। इस पर लिखा था- “कश्मीर की आजादी तक, भारत की बर्बादी तक, जंग जारी रहेगी। खुदा के लिए जिहाद करना है।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ये ग्रुप घाटी में युवाओं को ब्रेनवॉश कर रहा है। पोस्टर लगाकर उन्हें जिहाद के लिए उकसाया जा रहा है। इससे पहले साल 2021 में श्रीनगर के फेमस कृष्णा ढाबे के मालिक के बेटे आकाश मेहरा की हत्या की ग्रुप ने जिम्मेदारी ली थी।

कश्मीरी पंडितों ने कहा- इस बार डरने वाले नहीं

मुस्लिम जांबाज फोर्स का अचानक एक्टिव होना और फल्कान स्क्वॉड के धमकी भरे लेटर के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कश्मीरी पंडितों को किसी तरह से खतरना नहीं होगा।

वहीं 1990 के दशक में विस्थापन के बाद घाटी छोड़ने को मजबूर हुए कश्मीरी पंडित सरकार की योजना के तहत नौकरी के लिए वापस लौटे हैं। तभी से वे लोग कश्मीर के मट्टन में रह रहे हैं। अब दोबारा मिल रही धमकियों के चलते एक बार फिर विस्थापन का डर सता रहा है।

दैनिक भास्कर से बातचीत में कश्मीरी पंडितों ने बताया कि 3 साल तक घाटी में शांति थी, लेकिन अब अचानक धमकियाँ मिलनी शुरू हो गई हैं। वे कहते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह के फरवरी 2026 में कश्मीर के दौरे से पहले भी धमकियाँ आई थी। उन्होंने कहा कि इन धमकियों से वो अलर्ट तो हैं, लेकिन अब डरने वाले नहीं हैं।

RSS का नाम लेकर मिल रही धमकियों पर कश्मीरी पंडित कहते हैं कि वापस लौटने के बाद अपने धर्म और पहचान नहीं छिपाई है। बल्कि पुराने मंदिरों को फिर से ठीक किया गया है और लोग पूजा करने भी आ रहे हैं। वो कहते हैं कि आतंकी चाहते हैं कि हिंदू एक्टिव न हों, इसीलिए फिर से धमकी दे रहे हैं।

एक कश्मीरी पंडित कहते हैं कि आतंकियों की धमकियों को देखते हुए विलेज डिफेंस गार्ड की तरह ट्रेनिंग और लाइसेंसी हथियार मिलने चाहिए। उनका कहना है कि इससे हमले के दौरान वह खुद को बचा सकेंगे और अगर ऐसा हुआ तो कश्मीर से बाहर जा चुके कश्मीरी पंडित भी लौटेंगे।