दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (14 जनवरी 2026) को आतंकी साजिश और देश विरोधी गतिविधियों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ की चीफ आसिया अंद्राबी और उनकी दो करीबियों, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसीरीन को आतंकवाद से जुड़ी साजिशों का दोषी माना है। अतिरिक्त सत्र जज चंदरजीत सिंह ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसकी सजा की घोषणा अब शनिवार (17 जनवरी 2026) को की जाएगी।
किन धाराओं में फँसी आसिया अंद्राबी?
अदालत ने इन तीनों को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 18 (आतंकवादी साजिश रचना) और धारा 38 (आतंकवादी संगठन का सदस्य होना) के तहत अपराधी पाया है। कोर्ट ने माना कि इनके खिलाफ लगे आरोप साबित होते हैं कि ये भारत की संप्रभुता और एकता को नुकसान पहुँचाने के काम में लगी थीं।
NIA की जाँच: नफरत और आतंक का नेटवर्क
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में बेहद गंभीर खुलासे किए थे। जाँच में पाया गया कि आसिया और उनकी टीम ने न सिर्फ नफरत फैलाने वाले भाषण दिए, बल्कि समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा कर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रची।
ये तीनों महिलाएँ साइबर स्पेस (सोशल मीडिया और इंटरनेट) के जरिए पाकिस्तानी आकाओं और आतंकी संगठनों के संपर्क में थीं ताकि जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए मदद जुटाई जा सके। वे खुलेआम अलगाववाद का समर्थन करती थीं और मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने का काम करती थीं।
2018 से जेल में हैं आरोपित
आसिया अंद्राबी ने साल 1987 में कश्मीर में महिलाओं के लिए अलगाववादी संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ बनाया था। सरकार ने घाटी में अलगाववाद को जड़ से मिटाने के लिए अप्रैल 2018 में इन तीनों को गिरफ्तार किया था और तब से ये जेल में ही बंद हैं। इसके बाद सरकार ने इनके संगठन पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी। लंबे समय तक चली अदालती कार्रवाई में NIA ने यह साबित कर दिया कि इनके भाषण और बैठकें महज विरोध नहीं, बल्कि आतंक को मजबूत करने का एक जरिया थे।
अब आगे क्या?
दोषी करार दिए जाने के बाद अब सबकी नजरें 17 जनवरी पर टिकी हैं। उस दिन कोर्ट सजा पर दलीलें सुनेगा। UAPA की इन धाराओं के तहत दोषियों को उम्रकैद तक की कड़ी सजा हो सकती है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

