केरल हाई कोर्ट (HC) ने सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) को दो वामपंथी नेताओं के खिलाफ नया आपराधिक मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी। जाँच टीम ने कोर्ट ने बताया कि उसे इस मामले में ए अजिकुमार और पीएस प्रशांत के खिलाफ सबूत मिले हैं। ए अजिकुमार CPI के नेता हैं, जबकि पीएस प्रशांत CPI(M) के नेता और त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।
कोर्ट ने कहा कि SIT पूरी मेहनत और तेजी से जाँच आगे बढ़ाए। अगर जाँच में मिले सबूत सही साबित होते हैं तो साल 2025 से जुड़े इस मामले में नया केस दर्ज किया जाए या फिर द्वारपालक मामले में अतिरिक्त रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। इस फैसले के बाद अब लगातार तीसरे देवस्वम बोर्ड के कार्यकाल से जुड़े लोगों पर इस चर्चित मामले में आपराधिक कार्रवाई की नौबत आ गई है।
कोर्ट ने कहा, “सच्चाई सामने लाने और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए जाँच में कोई भी पहलू नहीं छोड़ा जाना चाहिए।”
जाँच अधिकारी एस शशिधरन ने कोर्ट में पेश अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया कि जाँच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि इस साजिश में सिर्फ शुरुआती आरोपित ही नहीं, बल्कि TDB के कुछ सदस्य और दूसरे अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
इससे पहले SIT ने पिछले साल दर्ज किए गए दो अन्य मामलों में CPI(M) के नेता और पूर्व विधायक एक पद्मकुमार को गिरफ्तार किया था। इनमें 2019 में हुई सोने की चोरी का मामला भी शामिल है। उस समय पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली पहली LDF सरकार सत्ता में थी। मौजूदा मामला 2023 का है। आरोप है कि उसी सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल के दौरान मंदिर की मूर्तियों को चेन्नई ले जाया गया था।
कोर्ट ने पाया कि मंदिर के द्वारपाल (रक्षक) की मूर्तियाँ, जिन पर पहली बार 1998 में सोने की परत चढ़ाई गई थी, उन्हें 2019 में चेन्नई की एक कंपनी में भेजा गया। ऐसा कारोबारी और इस मामले के मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी के कहने पर किया गया था। दावा किया गया था कि मूर्तियों पर नई सोने की परत चढ़ाने का काम होगा और उसकी देखरेख की जाएगी। लेकिन जब मूर्तियाँ वापस लाई गईं, तो पता चला कि उन पर पहले लगा कुछ सोना गायब था।
आरोपों के मुताबिक, मूर्तियों पर नई सोने की परत चढ़ाने के लिए बहुत कम सोने की जरूरत थी जबकि बाकी कीमती सोना चोरी कर लिया गया। इस चोरी को छिपाने के लिए एक फर्जी प्रमाणपत्र भी तैयार किया गया, जिसमें दावा किया गया कि सोने की परत पर 40 साल की वारंटी है। लेकिन कुछ ही महीनों में सोने की परत उतरने लगी और उसके नीचे मौजूद तांबे की सतह दिखाई देने लगी।
SIT के अनुसार, आरोपितों ने अपनी करतूत छिपाने के लिए एक और साजिश रची। इसके तहत मूर्तियों को दोबारा नई सोने की परत चढ़ाने के नाम पर चेन्नई भेजने की योजना बनाई गई। जाँच एजेंसी का कहना है कि नवंबर 2023 में पीएस प्रशांत के TDB का अध्यक्ष बनने के बाद मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी ने उनका भरोसा जीत लिया और इस योजना को मंजूरी दिलाने में सफल रहा।
SIT ने यह भी बताया कि बोर्ड के सदस्यों ने यह जानते हुए भी द्वारपाल मूर्तियों को दोबारा चेन्नई भेजने के फैसले का समर्थन किया कि यह देवस्वम नियमावली और कोर्ट के पहले के आदेशों के खिलाफ था। जाँच में मिले दस्तावेजों और बातचीत से यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारी और बोर्ड के सदस्य जानते थे कि 2019 में मूर्तियों से निकाला गया बचा हुआ सोना अब भी उन्नीकृष्णन पोट्टी के पास था। इसके बावजूद उन्होंने चोरी और सोने की चोरी को छिपाने में साथ दिया, बजाए इसके कि उसके खिलाफ कार्रवाई करते।
जाँच टीम का कहना है कि उसके पास ऐसे मजबूत सबूत हैं, जिनसे कार्यकारी अधिकारी मुरारी बाबू, प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी, स्मार्ट क्रिएशंस के मालिक पंकज भंडारी, पूर्व TDB अध्यक्ष पीएस प्रशांत, बोर्ड सदस्य एडवोकेट ए अजिकुमार, तिरुवाभरणम आयुक्त रेजीलाल और अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है।
SIT का कहना है कि इन लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, फर्जी दस्तावेज बनाने, भरोसे का गलत इस्तेमाल करने और अन्य गंभीर अपराधों के मामले बनते हैं। जाँच एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि इन आरोपों में कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है।

