₹2-3 लाख में खरीदो अंग, ₹50 लाख में बेचो: केरलम् से ऑर्गन ट्रैफिकिंग का धंधा चला रहा मोहम्मद नजीब गाजियाबाद में गिरफ्तार, जानें- कॉन्ग्रेस नेता से क्या है संबंध

केरल की कोच्चि पुलिस ने मानव अंगों के अवैध कारोबार (ऑर्गन रैकेट) का एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। इस पूरे काले धंधे का मुख्य आरोपित 53 वर्षीय मोहम्मद नजीब है। नजीब काफी हफ्तों से फरार चल रहा था। केरल पुलिस ने जाल बिछाकर नजीब को दिल्ली-UP बॉर्डर पर स्थित गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद नजीब मूल रूप से कासरगोड का रहने वाला है। उसे केरल लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कोच्चि सिटी पुलिस की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (SIT) अब उसकी कस्टडी लेकर आगे की पूछताछ की तैयारी कर रही है।

फर्जी पहचान पत्रों और फर्जी रिश्तेदारों को पूरा खेल

भारत में ऑर्गन डोनेशन (अंग दान) के नियम बेहत सख्त हैं। इस गिरोह ने उन नियमों को बायपास करने का एक आसान तरीका निकाला था। यह गिरोह गरीब और मजबूर लोगों को पैसों का लालच देकर उनके अंग (मुख्यत: किडनी) निकालता था।

डोनर और मरीज के बीच कोई रिश्ता न होने पर भी यह गिरोह फर्जी आधार कार्ड, नकली हलफनामे और जाली रिलेशनशिप सर्टिफिकेट तैयार करता था। इन दस्तावेजों में डोनर और मरीज को एक-दूसरे का सगा रिश्तेदार दिखा दिया जाता था।

बड़े नेताओं की नकली मुहर और डिजिटल स्टूडियो पर छापा

इस गिरोह का जाल इतना गहरा था कि इन्होंने कई सांसदों, विधायकों (जैसे हिबी ईडन, के राधाकृष्णन), तहसीलदारों और डॉक्टरों के नकली लेटरहेड, दस्तखत और मुहरें तैयार कर रखी थीं। पुलिस ने पल्लिकरा स्थित ‘साइन डिजिटल स्टूडियो’ पर छापा मारकर भारी मात्रा में नकली सरकारी मुहरें, जाली सर्टिफिकेट और लैपटॉप जब्त किए हैं।

यह स्टूडियो एक स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता पीआई अनवर का बताया जा रहा है, जो अब पुलिस की जाँच के दायरे में हैं। इस काम के लिए गिरोह के सदस्य अधिकारियों के नाम पर फर्जी फोन नंबर भी बनाते थे ताकि वेरिफिकेशन कॉल आने पर खुद ही हाँ बोल सकें।

मरीजों से 50 लाख की वसूली, डोनर को चंद रुपए

जाँच में सामने आया है कि यह रैकेट पिछले 3 से 5 सालों से चल रहा था। इस दौरान करीब 40 अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने का शक है। गिरोह के एजेंट अस्पतालों के चक्कर काटकर अमीर मरीजों को फँसाते थे। एक ट्रांसप्लांट के लिए मरीज से 20 लाख से 50 लाख रुपए तक वसूले जाते थे।

इसके बदले में अंग देने वाले गरीब व्यक्ति को सिर्फ 5 से 10 लाख रुपए ही मिलते थे। बाकी की मोटी रकम नजीब और उसके बिचौलिए (जैसे हाल ही में गिरफ्तार हुआ डेबिन जोसेफ, जो स्पा सेंटर की आड़ में काम करता था) आपस में बाँट लेते थे। एक पीड़िता महिला के हाई कोर्ट जाने के बाद इस पूरे मामले की कड़ियों का खुलासा हुआ।

इंटरनेशनल कनेक्शन और हवाला की जाँच तेज

पुलिस ने मुख्य आरोपित मोहम्मद नजीब की पत्नी रशीदा समेत अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। नजीब के खिलाफ पहले से ही मर्डर और धोखाधड़ी समेत करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने उसका पासपोर्ट, मोबाइल और पर्सनल डायरी जब्त कर ली है। उसके कक्कानाड स्थित बैंक खाते में लाखों रुपए के संदिग्ध लेन-देन मिले हैं।

पुलिस को अंदेशा है कि इस काली कमाई का हिस्सा विदेशों में भी भेजा गया है। NIA द्वारा पहले पकड़े गए ईरान और ताजिकिस्तान के इंटरनेशनल किडनी रैकेट से भी इसके तार जुड़े होने की आशंका की जाँच की जा रही है।