लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हिंदू महिला डॉक्टर को लव जिहाद में फँसाकर दुष्कर्म, गर्भपात कराने, धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग के आरोपित रेजीडेंट डॉक्टर रमीज को कोर्ट ने राहत देने से इंकार किया है।
कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है और कहा कि उस पर लगे आरोप, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं होगा।
शादी का झाँसा देकर बनाए संबंध फिर डाला धर्मांतरण का दबाव
अभियोजन के अनुसार, 2025 में पीड़िता की मुलाकात रेजीडेंट डॉक्टर रमीज से हुई। रमीज ने उससे यह भी छुपाया कि उसका निकाह पहले ही हो चुका है। रमीज ने शादी का भरोसा देकर पीड़िता से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। सितंबर 2025 में पीड़िता को पता चला कि वह गर्भवती है तब रमीज ने उसका गर्भपात करा दिया।
सितंबर 2025 में पीड़िता की मुलाकात एक महिला से हुई, जिसने खुद को रमीज की बीवी बताया। महिला ने बताया कि आरोपित ने उसका धर्मांतरण कराकर फरवरी 2025 में निकाह किया था। जब पीड़िता ने इस बारे में आरोपित से सवाल किया तो उसने इस बात से इनकार किया।
जब पीड़िता ने शादी की बात दोबारा उठाई तो आरोपित ने धर्म परिवर्तन के बाद निकाह की शर्त रखी। कोर्ट को यह भी बताया गया कि आरोपित अपने परिवार के साथ मिलकर महिलाओं पर धर्म बदलने का दबाव बनाता था। मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को नशीली गोलियाँ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था।
घटना के बाद उसने अपने पिता को पूरी जानकारी दी और KGMU प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 64(2)(e), 69, 89, 61(2)(a), 115(2), 123, 351(1), 352 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5 के तहत चार्जशीट दाखिल की है।

