बालाघाट में ₹77 लाख के इनामी कबीर समेत 10 नक्सलियों ने छोड़े हथियार, CM मोहन यादव ने सौंपी संविधान की प्रति: जानें कैसे ‘हॉक फोर्स’ की बैकचैनल बातचीत से बदला माओवादियों का मन

केंद्र सरकार के नक्सल मुक्त अभियान के तहत माओवादी घुटने टेक रहे हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के बालाघाट में कान्हा भोरमदेव (केबी) डिवीजन के 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। माओवादियों ने एके-47 सहित आठ हथियारों सीएम मोहन यादव को सौंपे और बदले में सीएम ने सभी को संविधान की प्रति दी। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में ₹77 लाख का इनामी सुरेंदर उर्फ कबीर भी शामिल है।

नक्सल-विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे हॉक फोर्स यूनिट के कमांडेंट शियाज केएम ने बताया कि केबी डिवीजन का माओवादी कबीर स्पेशल जोनल कमेटी और एक अन्य राकेश होदी डिवीजनल कमेटी का सदस्य था। वह कान्हा नेशनल पार्क में अपने समूह के साथ सक्रिय था। इस समूह ने सालभर में सुरक्षाबलों के साथ कम से कम तीन मुठभेड़ की। कबीर का सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इंस्पेक्टर की हत्या के बाद शुरू हुआ अभियान

माओवादियों का यह आत्मसमर्पण सुरक्षाबलों के सफल अभियानों के बाद हुआ है। ये अभियान हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की हत्या के बाद शुरू किया गया था। 32 वर्षीय इंस्पेक्टर के पास दो वीरता पदक और एक आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन था। वे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के त्रि-जंक्शन पर बोर तालाब के पास एक मुठभेड़ में शहीद हुए थे।

सम्मानित अधिकारी के शहीद होने के बाद हॉक फोर्स, मध्य प्रदेश पुलिस, महाराष्ट्र कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने संयुक्त रूप से सभी मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई से माओवादियों के भीतर डर बैठ गया और उनका प्रभाव कम होता गया। नतीजतन माओवादियों को घुटने टेकने पड़े और एक बड़ा आत्मसमर्पण हुआ।

हॉक फोर्स की लंबी बातचीत का नतीजा है आत्मसमर्पण

बालाघाट में बड़ी संख्या में माओवादियों का आत्मसमर्पण हॉक फोर्स की स्पेशल इंटेलिजेंस यूनिट की लंबी और शांत बातचीत का नतीजा था। कई दौर की बैकचैनल बातचीत के बाद यह कदम संभव हो पाया। शुरुआत में माओवादी एक भरोसेमंद वनरक्षक के जरिए सुरक्षा एजेंसियों तक पहुँचे। बाद में वे दो समूहों में कड़ी सुरक्षा के बीच IG के सरकारी बंगले पहुँचे।

इंडियन एक्सप्रेस को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “समूह ने हमें राष्ट्रीय उद्यान के भीतर अपने सोर्स के माध्यम से संदेश भेजा था। एक वनरक्षक उनकी बात सुन रहा था और उनकी शर्तें हम तक पहुँचा रहा था। पिछले महीने एक बड़े माओवादी विकास नागपुरे उर्फ नवज्योत उर्फ अनंत ने आत्मसमर्पण किया था और बाकी साथियों से भी हथियार छोड़ने की अपील की थी। उसी समय इन लोगों ने आगे बढ़ने का फैसला किया।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, माओवादी पहले छत्तीसगढ़ में सरेंडर करना चाहते थे क्योंकि उन्हें मध्य प्रदेश की एजेंसियों पर भरोसा नहीं था। लेकिन हॉक फोर्स की इंटेलिजेंस टीम लगातार संपर्क में रही और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाती रही। एक अधिकारी ने कहा, “हमने उन्हें समझाया कि मध्य प्रदेश में उनकी जान पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और यह भरोसा स्वयं मुख्यमंत्री की ओर से दिया गया है।”

कान्हा भोरमदेव (केबी) डिवीजन की लीडरशिप का पतन

स्पेशल कमेटी सदस्य कबीर और डिविजनल कमेटी सदस्य राकेश होदी के आत्मसमपर्ण से कान्हा भोरमदेव (केबी) डिवीजन की लीडरशिप का पतन हुआ है। दोनों ही माओवादी छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाके से ताल्लुक रखते हैं। कबीर सुकमा जिले से है जबकि राकेश महाराष्ट्र के पास के इलाकों से हैं।

50 साल का कबीर साल 1995 में नक्सलवाद से जुड़ा था और समय के साथ उसका औदा बढ़ता गया। वह सबसे बड़े माओवादी देवुजी का बॉडीगार्ड भी रह चुका है। 30 साल तक नक्सलवाद से जुड़े कबीर ने दंडकारण्य क्षेत्र में ट्रेनर के रूप में 2000 से 2003 तक भूमिका निभाई। फिर दरबा डिवीजन में 2004 से 2014 तक सैन्य प्रभारी के रूप में काम किया। अब 2016 के बाद से वह केबी डिवीजन में स्पेशल MMC जोन का सचिव था।

उसका करीबी साथी 42 साल का राकेश होदी साल 2002 में नक्सलवाद से जुड़ा था। इस दौरान होदी ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में कई ऑपरेशन को अंजाम दिया। हाल ही में केबी डिवीजन में उसे सेक्रेटरी के रूप में पदोन्नत किया गया था। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि कबीर, होदी और कान्हा-भोरमदेव डिवीजन के अन्य बड़े माओवादियों की गिरफ्तारी नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ा बदलाव है।

नए जेनरेशन के माओवादी ने भी किया आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण करने वाले बाकी आठ माओवादियों अधिकतर बीजापुर और सुकमा जिले के रहने वाले हैं और गोंड जनजातीय समुदाय से हैं। ये सभी 26 से 32 साल की उम्र के हैं, जो नए जेनरेशन के माओवादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अन्य 8 माओवादियों में समर उर्फ सामरू उर्फ राजू आत्राम, जरीना उर्फ जोगी मुसाक, नवीन हुप्पो उर्फ हिड़मा, सलीता उर्फ सावित्री अलावा, जयशीला उर्फ ललिता ओयम और शिल्पा हुप्पो शामिल हैं।