बिहार की राजनीति में इस समय सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, उनके करीबी सहयोगी संजय यादव और रमीज पर उनको अपमानित कर घर से बाहर निकालने का आरोप लगाया है।
रोहिणी का कहना है कि बिहार चुनाव में पार्टी की करारी हार को लेकर जब उन्होंने सवाल उठाए, तो तेजस्वी और उनके करीबी सहयोगी संजय यादव और रमीज ने उन्हें अपमानित किया, घर से बाहर निकाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों सहयोगियों की वजह से उन्हें परिवार और राजनीति दोनों छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
रोहिणी ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “मेरा कोई परिवार नहीं है, ये जाकर आप संजय, रमीज तेजस्वी यादव से पूछिए। वो ही लोग निकाला है हमको परिवार से, क्योंकि रिस्पॉन्स्बिलिटी लेना नहीं है उनको, पूरा दुनिया बोल रहा है, जो चाणक्य बनेगा, तो चाणक्य से ना आप सवाल पूछिएगा।”
Patna, Bihar: RJD chief Lalu Yadav’s daughter Rohini Acharya says, "I have no family. Ask Sanjay, Rameez, and Tejashwi Yadav. They are the ones who removed me from the family because they don’t want to take responsibility… The entire country is asking why the party has reached… pic.twitter.com/HL57mK0u0j
— IANS (@ians_india) November 15, 2025
उन्होंने कहा, “इस समय पूरा देश सवाल कर रहा है कि पार्टी का ऐसा हाल क्यों हुआ और जब संजय, रमीज का नाम लीजिएगा, तो आपको घर से निकाल दिया जाएगा, आपको बदनाम किया जाएगा, आपको गाली दिलवाया जाएगा, आपके ऊपर चप्पल उठाकर मारा जाएगा।”
कौन हैं संजय और रमीज?
संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते हैं और 2024 में राजद ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा था। वहीं रमीज को तेजस्वी का पुराना और बेहद करीबी मित्र बताया जाता है। रोहिणी का कहना है कि इन्हीं दोनों ने उन्हें परिवार से दूर करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
इस विवाद ने राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है। बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि रोहिणी ने लालू प्रसाद के लिए अपनी किडनी तक दान कर दी थी, ऐसे में परिवार के भीतर इस तरह का अलहाव बेहद दुखद है।
यह पूरा घटनाक्रम बिहार चुनाव के निराशाजनक नतीजों के बाद सामने आया है। 75 सीटों वाली आरजेडी सिर्फ 25 पर सिमट गई, जो 2010 के बाद दल की सबसे खराब स्थिति मानी जा रही है। महागठबंधन भी 40 सीटों से नीचे रहा और सत्ता से काफी दूर रह गया।
तेजस्वी के नेतृत्व पर भी अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रोहिणी के आरोपों ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पार्टी की अंदरूनी राजनीति में भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

