निकाले गए कर्मचारियों में मोहम्मद इश्फाक है, जो एक टीचर है। वहीं बशीर अहमद मीर, जो एक लाइनमैन है । ये दोनों लश्कर ए तैयबा के लिए काम करते थे। फारूख अहमद भट, जो वन विभाग में फील्ड वर्कर है, तारिक अहमद राह एक लैब टेक्नीशियन है और मोहम्मद युसुफ स्वास्थ्य विभाग में एक ड्राइवर है, ये तीनों हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम करते थे।
सिक्योरिटी एजेंसियों ने बताया कि मोहम्मद इस्तियाक लश्कर-ए-तैयबा कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के रेगुलर कॉन्टैक्ट में था। अप्रैल 2022 में मरहीन इलाके से गिरफ्तार हुए टीचर इश्तियाक पर आरोप है कि वह जेल में बंद रहते हुए भी साथी कैदियों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ा रहा था।
2011 से अनंतनाग के एक हॉस्पिटल में काम करने वाला तारिक अहमद राह हिजबुल मुजाहिदीन के ‘डिवीजनल कमांडर’ अमीन बाबा उर्फ आबिद का भतीजा है। खबर है कि 2005 में अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने की SIA की जाँच के दौरान उसके लिंक सामने आए थे। हालाँकि राह को गैरकानूनी गतिविधि करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था और बाद में बेल पर रिहा कर दिया गया था, लेकिन खुफिया जानकारी के मुताबिक, वो जल्द ही आतंकियों के संपर्क में आ गया।
बशीर अहमद मीर को 1988 में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में नौकरी मिली और 1996 में रेगुलर हुआ। वह गुरेज और बांदीपोरा में LeT का एक सक्रिए ग्राउड वर्कर था। रिपोर्ट के मुताबिक, मीर ने टेररिस्ट मूवमेंट में मदद की, लॉजिस्टिक सपोर्ट और शेल्टर दिया, और सुरक्षाकर्मियों के बारे में आतंकियों को संवेदनशील जानकारियाँ दी।
एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, “मीर जैसे लोग, जो टेररिस्ट नेटवर्क की मदद करते हुए सरकारी सर्विस में बने रहते हैं, नेशनल सिक्योरिटी के लिए गंभीर खतरा हैं।”
अनंतनाग में पोस्टेड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एक कर्मचारी फारूक अहमद भट पर हिजबुल मुजाहिदीन को सक्रिय रूप से समर्थन करने और हिजबुल से कथित तौर पर जुड़े एक पूर्व विधायक की मदद करने का आरोप था। मोहम्मद यूसुफ 2009 में स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर के तौर पर नियुक्त हुआ। जब वह श्रीनगर के बेमिना में कार्यरत था,तब पाकिस्तान-बेस्ड हिजबुल मुजाहिदीन हैंडलर बशीर अहमद भट के नियमित कॉन्टैक्ट में रहता था।
फरार लोगों के खिलाफ एक्शन
एक पैरेलल ऑपरेशन में, जम्मू और कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) विंग ने एंटी-नेशनल और गैर-कानूनी एक्टिविटी में शामिल होने के आरोप में तीन फरार लोगों के खिलाफ आदेश जारी किए हैं।
फरार लोगों में श्रीनगर के बुचवाड़ा के एक बिज़नेसमैन मुबीन अहमद शाह, जवाहर नगर के एक आर्किटेक्ट अज़ीज़-उल-हसन उर्फ टोनी अशाई और कुपवाड़ा ज़िले के त्रेहगाम के रिफत वानी शामिल है।
इनलोगों को कहा गया है कि तय समय में कोर्ट के सामने पेश न होने पर कानून के मुताबिक चल और अचल दोनों तरह की प्रॉपर्टी जब्त कर ली जाएगी।
पुलिस ने कहा कि यह मामला गंभीर अपराधों से जुड़ा है, जिनसे पब्लिक ऑर्डर, सांप्रदायिक सद्भाव और देश की एकता को खतरा है।
उन्होंने आगे कहा कि जाँच में एक सुनियोजित साजिश का पता चला है, जिसे कथित तौर पर घाटी के अंदर और बाहर से काम कर रही अलगाववादी ताकतों के इशारे पर अंजाम दिया गया था।
जाँच में पाया कि आरोपितों ने खुद को पत्रकार, फ्रीलांसर और न्यूज पोर्टल चलाने वाले के तौर पर पेश किया था, और कथित तौर पर एक कोऑर्डिनेटेड डिजिटल प्रोपेगैंडा ऑपरेशन चला रहे थे। फेसबुक, X (पहले ट्विटर) और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करके, उन पर अशांति फैलाने के लिए गलत खबर फैलाया। यहाँ तक कि अलगाववादी और गुमराह करने वाला कंटेंट फैलाने का आरोप है।

