भारत की संसदीय कूटनीति को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार (24 फरवरी) को एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दुनिया के 64 देशों के साथ संवाद और संबंध बेहतर करने के लिए ‘पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स’ (PFG) का गठन किया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की लोकतांत्रिक आवाज को मजबूती से रखना और मित्र देशों के साथ संसदीय सहयोग बढ़ाना है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह के ग्रुप बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर अब अमल किया गया है।
सांसदों की बड़ी टीम और दिग्गज ग्रुप लीडर्स
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित इन 64 फ्रेंडशिप ग्रुप्स में भारतीय संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के कुल 704 सांसदों को शामिल किया गया है। कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक ग्रुप की कमान एक ‘ग्रुप लीडर’ को सौंपी गई है, जिनकी सहायता के लिए 10 अन्य सदस्य साथ रहेंगे।
अगर पार्टीवार नेतृत्व की बात करें, तो सत्ताधारी भाजपा के पास सबसे ज्यादा 30 ग्रुप लीडर्स की जिम्मेदारी है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के 10 सांसदों को लीडर बनाया गया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी, DMK और TMC के भी 3-3 सांसदों को नेतृत्व का अवसर दिया गया है।
ग्रुप लीडर्स की इस सूची में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई कद्दावर चेहरे शामिल हैं, जहाँ भाजपा से हेमा मालिनी, मनोज तिवारी और निशिकांत दुबे जैसे बड़े नाम नेतृत्व करेंगे, वहीं विपक्ष से शशि थरूर, अभिषेक बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता ने तैयार की जमीन
PFG के गठन के पीछे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बड़ी भूमिका रही है। मई 2025 में भारत ने 59 सदस्यों वाला एक डेलिगेशन दुनिया के 33 देशों (खासकर UNSC सदस्यों) में भेजा था। इस मिशन का मकसद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का कड़ा पक्ष दुनिया के सामने रखना था।
सांसदों के उस डेलिगेशन ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत अब आतंकी खतरों को लेकर उदासीन रहने के बजाय ‘प्रो-एक्टिव’ रवैया अपनाएगा और हमलावरों को उनके घर में घुसकर ढेर करेगा।
दुनिया को क्या संदेश देंगे ये ग्रुप्स?
पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स (PFG) के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के पाँच सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों पर दुनिया का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा। इन ग्रुप्स का प्राथमिक उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि भारत की सैन्य कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित है और देश आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अडिग है।
साथ ही, ये सांसद सबूतों के साथ दुनिया को बताएँगे कि पहलगाम जैसे हमलों के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का ही हाथ है, जिससे पड़ोसी देश के असली चेहरे को बेनकाब किया जा सके। कूटनीतिक स्तर पर यह भी रेखांकित किया जाएगा कि सैन्य कार्रवाई के दौरान भी भारत ने एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में अत्यधिक संयम बरता है।
इसके अतिरिक्त, इन समूहों का लक्ष्य आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता बनाना और विश्व शक्तियों से सहयोग माँगना है। अंत में, यह पहल भारत की उस बदली हुई और आक्रामक नीति को भी दुनिया के सामने रखेगी, जिसके तहत अब देश सीमा पार से आने वाले किसी भी खतरे का इंतजार करने के बजाय उसे पहले ही निष्क्रिय करने की पूरी इच्छाशक्ति और क्षमता रखता है।

