मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर गरमा गया है। शुक्रवार (8 मई 2026) को इंदौर HC में हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने माँग की कि भोजशाला का मूल धार्मिक स्वरूप वापस दिलाया जाए और वहाँ केवल हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति मिले। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।
क्या है ताजा विवाद?
हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के 2003 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह व्यवस्था कानून के खिलाफ है और इसे तुरंत खत्म कर वहां का पुराना स्वरूप बहाल करना चाहिए।
हिंदू पक्ष के तर्क: ‘यह मस्जिद नहीं, मंदिर है’
सुनवाई के दौरान कोर्ट में दलील दी गई कि भोजशाला परिसर में मीनार या वजूखाना जैसी मस्जिद की कोई भी पहचान मौजूद नहीं है। वकील ने तर्क दिया कि किसी भी ऐतिहासिक स्मारक का इस्तेमाल उसके असली धार्मिक स्वरूप के खिलाफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था हिंदुओं के पूजा करने के अधिकार को रोकती है।
मुस्लिम पक्ष की सफाई
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने ‘पूजा स्थल अधिनियम 1991’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के समय (1947) यह जगह एक मस्जिद के रूप में थी, इसलिए इसके स्वरूप को अब बदला नहीं जा सकता। हालांकि, हिंदू पक्ष ने इस बात को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए इस पर 1991 का कानून लागू नहीं होता।
अब आगे क्या?
फिलहाल हाई कोर्ट में इस मामले से जुड़ी 5 याचिकाएँ और एक अपील लंबित हैं। 11 मई को होने वाली अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि कोर्ट दोनों पक्षों के दावों और कानूनी बारीकियों पर विस्तार से विचार करेगा। फिलहाल भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

