मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के दफ्तर (CMO) ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट पर बड़ा बयान जारी किया है। दफ्तर से जुड़े सूत्रों ने साफ कहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव की जमीन में एक इंच की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
नवंबर 2023 में उनके पास जितनी कृषि भूमि थी, जून 2026 तक भी उनके पास उतनी ही जमीन है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री और उनके परिवार को लेकर जो भी दावे किए गए थे, वे पूरी तरह गलत और भ्रम फैलाने वाले हैं।
क्या था अखबार की रिपोर्ट का दावा?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनकी कंपनियों ने उज्जैन में बहुत सारी जमीन खरीदी है। रिपोर्ट के अनुसार उनके परिवार ने करीब 45 करोड़ रुपए की 168 एकड़ जमीन के 137 प्लॉट खरीदे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये जमीनें उन जगहों पर हैं जहाँ सरकारी विकास योजनाओं से सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है। अखबार ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद इस जमीन को खरीदा गया और इसका कुछ हिस्सा परिवार के लोगों के बीच ही ट्रांसफर किया गया।
मुख्यमंत्री दफ्तर ने आँकड़ों के साथ दिया जवाब
मुख्यमंत्री दफ्तर ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। दफ्तर ने बताया कि नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री के पास 17.967 एकड़ कृषि भूमि थी और आज भी उतनी ही जमीन है। यह जानकारी उनके चुनावी हलफनामे में भी दी गई है।
इसी तरह उनकी पत्नी सीमा यादव के पास नवंबर 2023 में 12.287 एकड़ जमीन थी, जो अब 12.292 एकड़ है। उनकी पत्नी की ज्यादातर जमीन साल 2008 से 2019 के बीच ही खरीदी गई थी। यह समय मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले का है।
कंपनियों और बेटे की जमीन पर भी स्थिति साफ
रिपोर्ट में ‘सृष्टि विनायक’ नाम की एक कंपनी का भी जिक्र किया गया था। इस पर स्पष्टीकरण आया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी साल 2017 में ही इस कंपनी के डायरेक्टर पद से हट गए थे।
साल 2026 तक उन्होंने अपने सारे शेयर भी छोड़ दिए थे। मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यादव ने जो जमीन खरीदी थी, वह भी उनके मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले खरीदी गई थी। बेटे ने यह जमीन साल 2019 से मार्च 2023 के बीच खरीदी थी, जबकि मोहन यादव 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बने थे।
मास्टर प्लान और बहू की जमीन पर भी आया जवाब
मुख्यमंत्री की बहू शालिनी यादव की जमीन को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। उनकी बहू ने साल 2025 में जो जमीन खरीदी है, वह मास्टर प्लान के दायरे से बाहर है। वह पूरी तरह एक कृषि भूमि है और किसी भी कमर्शियल इलाके में नहीं आती है।
उज्जैन का मास्टर प्लान भी मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही मई 2023 में लागू हो चुका था। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने किसी सड़क या विकास योजना के फैसले को प्रभावित किया है।
रिश्तेदार अपना खुद का बिजनेस करने के लिए स्वतंत्र
मुख्यमंत्री दफ्तर ने अंत में साफ कहा है कि मुख्यमंत्री के जितने भी रिश्तेदार हैं, वे सभी स्वतंत्र व्यक्ति हैं। वे अपना खुद का बिजनेस और जमीन का लेन-देन करने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। उनके निजी कारोबार या जमीन की खरीद-फरोख्त को मुख्यमंत्री से जोड़ना कानूनी और तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत है।
सरकारी रिकॉर्ड और सार्वजनिक तथ्यों से यह साफ हो चुका है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की ज्यादातर संपत्ति उनके पद संभालने से पहले की है। अखबार की रिपोर्ट में बातों को घुमा-फिराकर पेश किया गया है।

