30 साल बाद ऑस्ट्रेलिया में हुए इस विभत्स आतंकी हमले ने दुनियाभर को हिला कर रख दिया। मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है।
50 साल का आतंकी साजिद अकरम और उसका बेटा 24 साल का नवीद अकरम ने बॉन्डी बीच पर हनुक्का त्योहार मना रहे यहूदियों पर ऊँचाई से पेड़ की आड से अँधाधुँध गोलियाँ चलाई।
10 साल की प्यारी माल्टिडा को भी नहीं छोड़ा
पुलिस के मुताबिक, आतंकी हमले में जान गँवाने वाली सबसे कम उम्र की 10 साल की छोटी बच्ची माल्टिडा थी, जो सिडनी के हार्मनी रशियन स्कूल में पढ़ती थी।
माल्टिडा की रिश्तेदार के मुताबिक, वह बहुत प्यारी बच्ची थी जिसकी मुस्कुराहट सबका मन मोह लेती थी।
माल्टिडा की टीचर ने GoFundMe पेज पर उसे याद करते हुए लिखा, “मैं उसे एक होशियार, खुशमिजाज और जोशीली बच्ची के रूप में जानती थी, जो अपने आसपास सभी के जीवन में रोशनी लाती थी।”
1990 में पूरा परिवार यूक्रेन से ऑस्ट्रेलिया आया था। वह उस दिन जू से होकर पिकनिक मनाने बीच पर पहुँचे थे।
रब्बी एली श्लेंगर
यहूदी संगठन ने एक बयान में कहा कि 41 साल के रब्बी एली श्लेंगर ने बॉन्डी बीच पर ‘चानुका बाय द सी’ इवेंट ऑर्गनाइज़ किया और बॉन्डी के चबाड में असिस्टेंट रब्बी के तौर पर काम किया।
एलेक्स क्लेटमैन
यहूदी संगठन चबाड के अनुसार, 87 साल के एलेक्स क्लेटमैन होलोकॉस्ट सर्वाइवर थे, जिनकी मौत तब हुई जब वे अपनी पत्नी लारिसा को बंदूकधारियों की गोलियों से बचा रहे थे।
मारे गए लोगों में एकमात्र फ्रांसीसी नागरिक डेन एल्कायाम थे। ये यहूदी कार्यक्रम का आनंद उठाने आए थे। वह फुटबॉल फेन भी थे।
मेरा बेटा अच्छा लड़का है- आतंकी की माँ
बॉन्डी बीच पर गोलियाँ बरसाने वाले नवीद अकरम की माँ का कहना है कि उसका बेटा एक ‘अच्छा लड़का’ है। माँ के मुताबिक, उसे विश्वास नहीं होता है कि उसका बेटा ऐसा कर सकता है। उसके पास हथियार नहीं था। वह बाहर भी नहीं जाता था। उसके दोस्त नहीं थे और वह न ही शराब पीता था और न ही सिगरेट पीता था।

