अफ्रीकी देश सूडान एक बार फिर भीषण हिंसा की चपेट में आ गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दारफुर क्षेत्र के एल-फाशेर शहर में सिर्फ तीन दिनों के भीतर 6,000 से अधिक लोगों की जान चली गई। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में हुए इन हमलों को हालिया वर्षों की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बताया जा रहा है।
गवाहों के बयानों और जमीनी सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर हत्या, यौन हिंसा और नागरिकों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि हुई है।
#Sudan: RSF violations during capture of besieged El Fasher amount to war crimes & possible crimes against humanity –@UNHumanRights report documents mass killings, abductions & summary executions, with over 6,000 people killed just in the first three days.https://t.co/AJQcugfA8e pic.twitter.com/JOd6IIk1G7
— UN Human Rights (@UNHumanRights) February 13, 2026
18 महीने की घेराबंदी के बाद भीषण हमला
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच सत्ता संघर्ष जारी है। एल-फाशेर दारफुर में सेना का आखिरी बड़ा गढ़ माना जाता था। करीब 18 महीने तक शहर की घेराबंदी के बाद 26 अक्टूबर को RSF ने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया।
रिपोर्ट के अनुसार, 25 से 27 अक्टूबर के बीच शहर के भीतर कम से कम 4,400 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 1,600 लोग भागने के दौरान मारे गए। इस तरह तीन दिनों में मृतकों की संख्या 6,000 से ऊपर पहुँच गई।
आम नागरिकों पर कहर, महिलाओं और बच्चों पर भी अत्याचार
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि हमलों के दौरान अंधाधुंध गोलीबारी, घरों में घुसकर हत्या, महिलाओं के साथ यौन हिंसा, बच्चों समेत लोगों का अपहरण, यातनाएं और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के फांसी जैसी घटनाएँ सामने आईं। कई मामलों में जातीय पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाया गया।
एक घटना में एक विश्वविद्यालय के हॉस्टल में शरण लिए करीब 1,000 लोगों पर भारी हथियारों से हमला हुआ, जिसमें लगभग 500 लोग मारे गए। वहीं दूसरी जगह करीब 600 लोगों को एकत्र कर गोली मार दी गई, जिनमें 50 बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा एक अस्पताल पर हुए हमले में भी सैकड़ों लोगों की मौत की आशंका जताई गई है।
बढ़ता मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। डेढ़ साल से चल रहे इस संघर्ष ने सूडान को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक में बदल दिया है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं और कई इलाकों में भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने चेतावनी दी है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से हिंसा का यह सिलसिला और तेज हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप और मानवीय सहायता बढ़ाने की अपील की गई है।

