मुस्लिम परिवार ने मृत महिला की आँखें की दान, कट्टरपंथियों ने किया हंगामा: बंगाल पुलिस ने पीड़ित परिवार के 5 लोगों को किया अरेस्ट

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक मुस्लिम परिवार द्वारा अपनी मृत अम्मी की आँखें दान करने का फैसला भारी विवाद का कारण बन गया। इस मानवीय कदम को लेकर स्थानीय इस्लामियों और पड़ोसियों के विरोध के बाद पुलिस ने परिवार के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। उन पर चोरी, आपराधिक धमकी और सामूहिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

अम्मी की आखिरी इच्छा पूरी करने पर गिरफ्तारी

8 फरवरी 2026 को कृष्णानगर-1 ब्लॉक के सेंगेपुर गाँव में रहने वाले अमीर चाँद शेख, उनके भाई अब्दुल शेख और परिवार की तीन महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इन पर अपनी अम्मी राबिया बीबी की अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी आँखें दान करवाने का आरोप लगाया गया।

राबिया बीबी का 8 फरवरी 2026 को इंतकाल हुआ था, जिसके बाद एक मेडिकल टीम उनके कॉर्निया लेने उनके घर पहुँची थी। हालाँकि, पड़ोसियों को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमीर पर अपनी अम्मी की आँखें बेचने का झूठा आरोप लगाया गया।

पुलिस ने इस आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) (चोरी की सजा), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 3(5) (सामूहिक इरादा) के तहत केस दर्ज किया। आँखें विधिवत अस्पताल को दान की गई थीं, इसके बावजूद भारी विरोध और हंगामे के चलते राबिया बीबी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

इस्लामी कट्टरपंथियों पर हमले और झूठे केस का आरोप

टीचर अमीर शेख ने आँखें बेचने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें साजिश के तहत फँसाया गया है। अमीर का आरोप है कि पड़ोस के कुछ लोगों ने जमीन विवाद और जलन के चलते उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवाया।

उन्होंने यह भी कहा कि अम्मी की इच्छा पूरी करने से कुछ कट्टरपंथी इस्लामवादी नाराज हो गए, जिन्होंने उनके परिवार पर हमला किया, घर में तोड़फोड़ की और झूठे मुकदमे दर्ज करवाए। अमीर के मुताबिक, उन्होंने पुलिस को सभी जरूरी दस्तावेज दिखाए, इसके बावजूद पुलिस ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया और कोई राहत नहीं दी।

स्वैच्छिक अंगदान भारत में पूरी तरह कानूनी है, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई लोग प्रशासन पर इस्लामी कट्टरपंथियों को खुश करने का आरोप लगा रहे हैं। परिवार की गिरफ्तारी के विरोध में स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन भी हुए और उनकी रिहाई की माँग की गई।

3 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 12 फरवरी 2026 को अमीर शेख, उनके भाई अब्दुल और परिवार की तीन महिलाओं को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद अमीर शेख ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में दोबारा अपनी ड्यूटी संभाल ली है।